कोर्ट ने मामले में याची को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। जस्टिस राम औतार सिंह का कहना है कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-9 के तहत आयोग को किसी मुकदमे में पार्टी नहीं बनाया जा सकता है।
नवंबर तक रिपोर्ट दे पाएगा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग
राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए 18 मई को उप्र राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई अनिवार्य व्यवस्था के तहत आयोग बनाया गया है। इसका मुख्य कार्य राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और पिछड़ेपन का अध्ययन करना है।
आयोग के अध्यक्ष के अनुसार सभी 75 जिलों के डीएम से पिछड़े वर्ग की आबादी के आंकड़े ले लिए गए हैं। आयोग ने अब तक तीन जिलों मेरठ, हापुड़ और बागपत का दौरा भी कर लिया है। ब्लॉक और गांव स्तर पर जाकर डीएम से मिले आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। आयोग अंतिम रिपोर्ट देने से पहले सभी 75 जिलों में भ्रमण करेगा। इसमें 6 माह लगेंगे। हम अपनी रिपोर्ट नवंबर तक दे पाएंगे।