110 लाख करोड़ के नए निवेश के लिए इन्वेस्ट यूपी की टीम नई रणनीति पर काम कर रही है। सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जिन देशों से आता है और सबसे ज्यादा निर्यात जिन देशों में किया जा रहा है, उन देशों पर ज्यादा फोकस है। इस वित्त वर्ष में देश में सबसे ज्यादा निवेशक सम्मेलन हुए। ये असम, राजस्थान, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल में हुए। यूपी की टीम इन पांचों प्रदेशों के सम्मेलन का अध्ययन कर नई पहल की रिपोर्ट तैयार कर रही है। जैसे कर्नाटक अपने निवेशक सम्मेलन में लैंड बैंक लेकर निवेशकों के बीच गया। इस फॉर्मूले को यहां लागू किया जा सकता है। पहली बार वेरीफाइड एमओयू और निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
गुजरात में कुल एमओयू में से 7 फीसदी का भूमि पूजन समारोह हुआ
असम में कुल एमओयू में से 12 फीसदी का भूमि पूजन समारोह हुआ
यूपी में कुल एमओयू में से 38 फीसदी का भूमि पूजन समारोह हुआ
औद्योगिक विकास विभाग द्वारा निवेशकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि आठ वर्ष में चार गुना बढ़ी है। वर्ष 2017-18 में जहां 575 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि निवेशकों को दी गई थी। वर्ष 2024-25 में ये बढ़कर 2229 करोड़ रुपये हो गई। इन्वेस्ट यूपी में वर्तमान में 14 आवेदन लंबित हैं। दो वर्ष में 55 कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जा चुका है। इनमें से 11 निवेश प्रत्यक्ष विदेश नीति के तहत आए हैं। इन 55 कंपनियों के जरिये प्रदेश में 42000 करोड़ रुपये निवेश किए जा चुके हैं।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था दस खरब डॉलर बनाने के लिए 110 लाख करोड़ रुपये के एमओयू की जरूरत है। इसीलिए नवंबर से फरवरी के बीच वैश्विक निवेशक सम्मेलन कराया जाएगा, जो अबतक का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा। इसी अवधि में न्यूनतम 3 लाख करोड़ का भूमि पूजन समारोह भी कराने की तैयारी है। निवेशकों की सुविधा और निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सुनियोजित रणनीति के साथ काम हो रहा है। इसमें दिग्गज प्रोफेशनल्स की सेवाएं ली जा रही हैं। -
प्रथमेश कुमार, सीईओ, इन्वेस्ट यूपी