बलरामपुर में पकड़े गए साइबर अपराधी
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साइबर थाना पुलिस के अनुसार इसे टेथर भी कहा जाता है। यह एक क्रिप्टोकरेंसी है जो अमेरिकी डॉलर के बराबर मूल्य रखने के लिए तैयार की गई है। इसका मूल्य अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जिससे इस क्रिप्टोकरेंसी को बाजार में सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
एजेंसियां अलर्ट, पाक कनेक्शन की जांच
सस्पियर गिरोह का खुलासा होते ही जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। माना जा रहा है कि गिरोह के तार पाकिस्तान में बैठे साइबर ऑपरेटरों से सीधे जुड़े हैं। पुलिस ने साफ किया कि गुत्थी पूरी तरह सुलझाने के लिए अभी जांच चल रही है। मामले में अभी कई और साइबर ठगों की पड़ताल हो रही है। एसपी ने बताया कि जांच लगातार की जा रही है। कुछ अहम जानकारी भी मिली है, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही और बड़े खुलासे होंगे।
साइबर ठगी कर टेरर फंडिंग के मामले में सरगना सस्पियर को पुलिस ने 26 जुलाई को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसके चार अन्य साथी भी पकड़े गए थे। इसके बाद एसपी ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान में बैठे साइबर ठगों को बलरामपुर से धनराशि भेजी गई थी। इसकी पुष्टि पांच मोबाइल नंबरों से हुई थी, जो पाकिस्तान के थे। इस खुलासे के बाद एसपी ने जांच टीम गठित की थी और अब सोमवार को मधुबनी निवासी गोलू कुमार और भूषण कुमार चौधरी को गिरफ्तार किया गया।