डॉ. शर्मा ने बताया कि राजकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में बेहतर संसाधन स्मार्ट क्लास, अत्याधुनिक लैब, जिम आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां अपेक्षाकृत शुल्क भी कम होता है। ऐसे में प्रचार-प्रसार कर व शिक्षकों की संख्या बढ़ाकर हम छात्रों को आकर्षित करेंगे। कॉलेजों का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाएं भी सुधारने का प्रयास करेंगे।
पारंपरिक नहीं, प्रोफेशनल कोर्स ही बढ़ाएंगे छात्र संख्या: प्रदेश के उच्च शिक्षण व तकनीकी संस्थानों में छात्रों की घटती संख्या का बड़ा कारण पारंपरिक कोर्स का संचालन है। इन संस्थानों द्वारा प्रोफेशनल कोर्स के माध्यम से ही छात्रों को आकर्षित किया जा सकता है। अधिकतर राजकीय महाविद्यालयों में बीए, बीएससी, बीकॉम की ही पढ़ाई हो रही है। यह भी एक वजह है कि इस तरफ छात्र आकर्षित नहीं हो रहे हैं। पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि आज छात्र बीबीए, बीसीए, बीटेक आदि प्रोफेशनल कोर्सों की तरफ जा रहे हैं। ताकि इसको करने के बाद उन्हें सीधे रोजगार मिल सके। हमें इन कोर्स के साथ कौशल विकास पर फोकस करना होगा।
निजी कॉलेज और विवि भी दे रहे चुनौती: प्रदेश के युवाओं को उनके पास ही बेहतर उच्च शिक्षा देने के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा व सुविधाएं दी गई। किंतु तेजी से बढ़ रहे निजी कॉलेज व विश्वविद्यालय अब सरकारी संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 53 और कॉलेजों की संख्या 7520 से ज्यादा हो गई है। इसकी अपेक्षा सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 24 और राजकीय कॉलेजों की संख्या 216 है। इसमें भी 70 राजकीय कॉलेज अभी नए शुरू हुए हैं। यही वजह है कि उनके सामने छात्रों की संख्या का बड़ा संकट है।
(अमर उजाला ने प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में कहीं छात्र तो कहीं शिक्षकों की कमी से जुड़ी खबरें प्रकाशित की हैं। इसका संज्ञान लेते हुए विभाग कॉलेजों व शिक्षकों पर सख्ती शुरु करने के साथ ही नई योजना तैयार करने में जुट गया है।)