मुख्यमंत्री से करेंगे ग्रांट जारी करने का अनुरोध
कुलपति ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय होने के बावजूद लविवि को सिर्फ सालाना 35 करोड़ रुपये का ही तय अनुदान मिलता है। यह स्थिति पिछले 30 साल से अनुदान फ्रीज होने के बाद से बनी हुई है। इसकी वजह से खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है। प्रो. सैनी के मुताबिक वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में मुलाकात करेंगे। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस समस्या को जरूर समझेंगे।
ई-ऑफिस से पारदर्शी और पेपरलेस व्यवस्था
प्रो. सैनी ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली लागू करके सभी फाइलें, आदेश और पत्राचार ऑनलाइन किए जा रहे हैं। पुराने अभिलेखों की स्कैनिंग व कोडिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा। कागज, स्टेशनरी व अन्य संसाधनों पर होने वाला सालाना करोड़ों रुपये का खर्च भी बचेगा।
वाई-फाई से लैस होगा समूचा कैंपस
लगभग 225 एकड़ में फैले लविवि के दोनों परिसर को चरणबद्ध तरीके से वाई-फाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को निर्बाध डिजिटल संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। ऑनलाइन अध्ययन, शोध और प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी।
शोध और मूल्यांकन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण
पीएचडी वायवा, थीसिस मूल्यांकन और जेआरएफ से एसआरएफ पदोन्नति की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी है। इससे समयबद्धता, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी। संबद्ध महाविद्यालयों के निरीक्षण भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।