विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सर्वाधिक समय से मुख्यमंत्री रहने के लिए बधाई दी। ऊर्जा विभाग अपने पास रखने और निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की बात दोहराई। यह भी कहा कि मानसून सत्र शुरू होने पर निजीकरण के नाम पर किए गए घोटाले से हर विधायक को अवगत कराया जाएगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने क हा कि ऊर्जा मंत्री का सोशल मीडिया पर आया बयान पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है। बिजली कर्मी कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते। विदेश यात्रा को टोरेंट के निजीकरण को जोड़ना भी भ्रम फैलाने वाला कदम है।
निजीकरण प्रक्रिया की सीबीआई जांच हो- परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्मयंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का पूरा मसौदा असंवैधानिक तरीके से तैयार किया गया है। इसे तैयार करने वाली एडवाइजर कंपनी की नियुक्ति भी गलत तरीके से हुए हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में भी कहा गया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्क फोर्स ने निजीकरण के संबंध में फैसला लिया है। ऐसे में प्रकरण की सीबीआई जांच जरूरी है।