SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का दिया निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा, ''लोगों ने 500 रुपये और 1000 रुपये दिए हैं। आखिर में पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है। ट्रस्ट को जो भी राशि मिली है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जा सकता है ताकि लोगों को पता चले कि उनका पैसा ट्रस्ट तक पहुंच गया है। यह कोई विवादात्मक मामला नहीं है।''
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं। सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कुछ कदमों को आप नोट कर सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी होगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''अभी आप सभी मुद्दों को नोट कर लें। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान जांच पर है। हमें शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण जांच करनी होगी। हम एसआईटी को दो हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दे रहे हैं। बाकी का फैसला हम बाद में करेंगे।''
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा था- अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं?
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, "जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।" साथ ही अदालत ने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि "अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।" सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि उसके पहले के निर्देशों का पालन करते हुए सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।