69000 शिक्षक भर्ती मामले में हुई कथित अनियमितता पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ शब्दों में कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसले जल्द होना चाहिए, इसे लंबे समय तक नहीं लटकाया जा सकता।
जस्टिस एवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजरिया की पीठ में कहा कि अभ्यर्थी लंबे समय से दुविधा की स्थिति में है। उनके भविष्य को लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता। पीठ ने कहा कि मामला चाहे इधर वालों के पक्ष में हो या दूसरे पक्ष के, लेकिन इस पर फैसला जल्द होगा चाहिए। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 8 सितंबर से लगातार तीन दिन करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से कहा है कि वह इस मामले को लेकर समूह तैयार करें। मसलन, इस मामले से जुड़े आवेदनकर्ताओं, वादी और प्रतिवादियों को श्रेणी कौन-कौन से है। उनकी क्या आपत्तियां है या उनके आवेदनों में क्या मांगे है आदि। सरकारी वकील से कहा गया है कि वह एक सूची तैयार करें जिसमें यह निश्चित हो कि किन-किन पशुओं को किन-किन मसलों पर सुना जाना है। सरकारी वकील को दो हफ्ते के भीतर इस बारे में अदालत को अपना खाखा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सभी पक्षों को अपनी बातें रखने का मौका मिलेगा।
बता दे कि पहले इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपंकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी लेकिन पिछली सुनवाई से पीठ बदल गई है और अब नई पीठ इस पर सुनवाई कर रही है। नई पीठ इस मुद्दे से जुड़े तमाम पहलुओं को समझने के लिए यह वक्त लिया है।