मोबाइल फोन पर 18 फीसदी जीएसटी घटाकर पांच फीसदी करने की मांग इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से की है। आईसीईए ने आगामी जीएसटी काउंसिल बैठक में दर घटाने का प्रस्ताव रखने की मांग की है।
आईसीईए चेयरमैन पंकज महेंद्रू ने पत्र में कहा कि मोबाइल फोन की डीआरएएम और नैंड फ्लैश मेमोरी की कीमतें सितंबर 2025 से चार गुना बढ़ी हैं। इससे एंट्री-लेवल फोन 35 से 45 फीसदी महंगे हुए हैं। 10 हजार रुपये से कम कीमत वाले फोन की आपूर्ति घटकर पांच फीसदी से भी कम रह गई है।
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उन्होंने बताया कि जीएसटी से पहले उत्पाद शुल्क व राज्यों के वैट समेत मोबाइल फोन पर कर करीब सात फीसदी था। जुलाई 2017 में मोबाइल फोन को 12 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखा गया, अप्रैल 2020 में इसे 18 फीसदी किया गया। एसोसिएशन ने मूल फिटमेंट सिद्धांत पर पांच फीसदी स्लैब को अधिक उपयुक्त बताया है। उसका कहना है कि जीएसटी नहीं घटा तो कर चोरी वाले फोन बाजार में आ सकते हैं।
मोबाइल उत्पादन बढ़ा, घरेलू बाजार पीछे
देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 के 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। निर्यात 1,566 करोड़ से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये पहुंचा। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और 2025-26 में मोबाइल फोन सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा। इसमें यूपी की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। आईसीईए के मुताबिक घरेलू मांग नहीं बढ़ी और उपभोक्ताओं का फोन बदलने का चक्र लंबा हुआ है। जीएसटी घटने से मांग-बिक्री बढ़ेगी, ग्रे मार्केट घटेगा। इसलिए राजस्व में सीधे 13 फीसदी कमी मानना उचित नहीं होगा।