कुलपति प्रोफ़ेसर अमर पाल सिंह व विधि विवि के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर मनीष सिंह
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50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत
इस परियोजना के लिए एमओएचयूए ने 50 लाख रुपये की मंजूरी दी है। परियोजना के तहत केंद्र, राज्य और शहरी स्थानीय निकायों के कानूनी ढांचे का अध्ययन कर बाधाओं की पहचान की जाएगी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए क्षेत्र विशेष के मॉडल कानून, उपनियम और अनुबंध भी तैयार किए जाएंगे।
रिपोर्ट के आधार पर तैयार होंगे नए मॉडल
अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार कानूनी और तकनीकी उपकरणों के प्रोटोटाइप विकसित करेगी। इसके जरिए सरकारी अधिकारियों, योजनाकारों और डेवलपर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही निम्न आय वर्ग के समुदायों और आवास क्षेत्र से जुड़े हितधारकों में कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देने की भी योजना है। यह समझौता पीएमएवाई-यू 2.0 की मिशन अवधि तक प्रभावी रहेगा।
उत्तरी राज्यों की चुनौतियों पर रहेगा फोकस
आरएमएलएनएलयू का अध्ययन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में भूमि स्वामित्व, किरायेदारी और रेरा क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित होगा। अध्ययन का उद्देश्य मुकदमेबाजी कम करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
योजनाओं के लिए विकसित होंगे मॉडल उपकरण
परियोजना के तहत राज्य कानूनों, किरायेदारी, शहरी नियोजन और रेरा से जुड़े विषयों पर गहन शोध किया जाएगा। इसके साथ सरलीकृत अनुबंध और राज्य उपनियमों के टेम्पलेट जैसे मॉडल उपकरण भी विकसित किए जाएंगे।
सरकार की प्रमुख आवास योजनाएं
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण : ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता।
- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 : शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना।
योजनाओं के प्रमुख बिंदु
- झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में पक्के मकानों का निर्माण।
- सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी से सस्ते आवास।
- ब्याज सब्सिडी के जरिए होम लोन पर राहत।
- स्वयं की जमीन वाले लाभार्थियों को निर्माण सहायता।
आवेदन की प्रक्रिया
योजनाओं के लिए आवेदन नजदीकी जन सेवा केंद्र या आधिकारिक वेबसाइट pmaymis.gov.in (शहरी) और pmayg.nic.in (ग्रामीण) के माध्यम से किया जा सकता है।