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फर्जी वेबसाइट बनाकर नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले 12 गिरफ्तार

Wed, 14 Oct 2020 03:18 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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महानगर पुलिस और एसटीएफ की टीम ने फर्जी वेबसाइट बना नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए सरगना समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोग बेरोजगार युवक-युवतियों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर फर्जी वेबसाइट में रुपये जमा कराने के बहाने उनके क्रेडिट व डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते थे और रुपये उड़ाकर ऐश करते थे। ठगों के पास से तीन लैपटॉप, 19 मोबाइल और एक कार समेत भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद हुए हैं।

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महानगर इंस्पेक्टर यशकांत ने बताया कि ठगों ने रहीमनगर निवासी शिवानी वारा को शिकार बनाया था। शिवानी ने नौकरी के लिए शाइनडॉटकॉम में ऑनलाइन आवेदन किया था। 19 अगस्त को राधिका नाम की युवती ने उसे कॉल करके खुद को एक्सिस बैंक की एचआर बताया। उसने नौकरी के लिए वॉट्सएप पर एक लिंक भेजकर मात्र 10 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने को कहा। शिवानी ने उक्त लिंक पर 10 रुपये जमा कर दिए पर उसके खाते से 1000 रुपये कट गए। शिकायत करने पर ठगों ने रिफंड के बहाने उसके खाते से दो बार में एक लाख रुपये उड़ा दिए। शिवानी ने महानगर कोतवाली में केस दर्ज कराया।

मामले की जांच कर रही महानगर पुलिस और एसटीएफ को पता चला कि उक्त फर्जीवाड़ा गाजियाबाद के राजनगर आरडीसी स्थित देविका चैम्बर के एक कॉल सेंटर से चल रहा है। पुलिस ने वहां दबिश देकर गिरोह के सरगना व दिल्ली के हर्ष विहार राजीव नगर निवासी शादाब खान उर्फ रोहन राठौर उर्फ फरहान और उसके साथी गाजियाबाद के निवाडी में रहने वाले अंकित कुमार समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि पकड़े गए लोगों में गाजियाबाद के कविनगर का महबूब, मानसी और ज्योति, सिंहानी नंदग्राम की गुंजन सैनी, मोदीनगर की शिवानी शर्मा, मुरादनगर की अना, प्राची और इमराना, सिंहानी के हरवंशनगर चक्कीवाली गली निवासी अर्पिता तथा दिल्ली के हर्ष विहार की गुरप्रीत शामिल हैं। शादाब और अंकित को महानगर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया जबकि बाकी सभी को नोटिस देकर छोड़ दिया गया।

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लैपटॉप में मिला दस हजार ग्राहकों के क्रेडिट-डेबिट कार्ड का ब्यौरा

पुलिस को कॉल सेंटर से तीन लैपटॉप मिले हैं जिसमें से एक में 10,000 ग्राहकों के क्रेडिट व डेबिट कार्ड का ब्यौरा दर्ज है। इसके अलावा बेरोजगारों से ठगी गई रकम के हिसाब-किताब के 12 रजिस्टर, चार एटीएम कार्ड, एक आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक वोटर आईडी कार्ड व एक वाई-फाई डोंगल मिला है।

इंटर पास सरगना ने तीन महीने पहले ही शुरू किया था अपना कॉल सेंटर
गैंग के सरगना शादाब खान ने तीन महीने पहले ही अपना कॉल सेंटर शुरू किया था। पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2016 में इंटर की परीक्षा पास करने के बाद नोएडा की कानसेंट्रिक्स कंपनी में रिलायंस जियो के कस्टमर केयर में बतौर एग्जिक्यूटिव पद पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद 2018 में कनवर्जेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव में डेल के कस्टमर केयर में एग्जिक्यूटिव रहा। यह कंपनी टेक सपोर्ट करती थी जिससे शादाब को तकनीकी जानकारियां मिलीं। इसके बाद उसने जुलाई 2020 में अपना खुद का कॉल सेंटर शुरू कर दिया। फिशिंग लिंक भेजने के लिए उसने अपने दोस्त शुभम उर्फ स्काई वर्मा से फर्जी वेबसाइट बनवाई। वह फर्जी नाम से सिमकार्ड लेकर लोगों को कॉल कराता था और हर 15 दिन में सिमकार्ड बदल लेता था।

फर्जी वेबसाइट से लेते थे कार्ड की गोपनीय जानकारियां
शातिर शादाब ने लोगों को ठगने के लिए शाइन जॉब्स सेलेक्शन डॉट इन नाम की वेबसाइट बनाई थी। यह वेबसाइट असली साइट से मिलते-जुलते नाम की थी इसलिए लोग भरोसा कर लेते थे। ठग वॉट्सएप के जरिए क्विक सपोर्ट और ऐनी डेस्क नाम के सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर फिशिंग लिंक भेजते थे। लिंक सीधे फर्जी वेबसाइट खोलता था। उक्त साइट में रजिस्ट्रेशन के लिए जो भी अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारियां डालता था, वह ठगों को दिख जाती थी। उस जानकारी को सेंटर के गुरप्रीत व गुंजन सुरक्षित रख लेते थे। बाद में कार्ड की इन्हीं जानकारियों से शातिर ठग खातों से रुपया उड़ाकर अमेजॉन के गिफ्ट वाउचर खरीदते, गोल्ड लोन चुकाते और ऑनलाइन शॉपिंग करते थे। सभी तरह के लेन-देन में फर्जी खातों का इस्तेमाल किया जाता था।
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