सॉफ्टवेयर में दूरी के अनुसार पहले से ही फॉर्म भरा जाता था। आईपी रिफ्लेक्ट न हो इसके लिए अलग-अलग प्रॉक्सी आईपी का इस्तेमाल करते थे। जैसे ही ऑनलाइन तत्काल टिकट के लिए बुकिंग शुरू होती, वैसे ही एक क्लिक पर एक बार में सैकड़ों टिकट बनाए जाते थे। सॉफ्टवेयर के जरिए ही कैप्चा और ओटीपी को भी बाईपास कर टिकटों की बुकिंग की जा रही थी।
यही वजह थी कि आम आदमी टिकट से वंचित रह जाते थे। एसएसपी के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे हामिद और शमशेर से सॉफ्टवेयर खरीदते थे। एसएसपी ने बताया कि ये दोनों बड़े ही शातिराना तरीके से वीओआईपी कॉल के जरिए कस्टमर से संपर्क करते हैं। यह धंधा लघु उद्योग की तरह खूब फल-फूल रहा है।