केस 1
एफएसडीए आयुक्त ने कानपुर के सहायक आयुक्त दिनेश कुमार तिवारी को फर्मों की जांच कराने का निर्देश दिया। माहभर बाद भी फर्मों की जांच नहीं कराई गई तो मुख्यालय से गठित टीम ने जांच किया। मौके पर कोडीन कफ सीरप व अन्य नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं मिलीं। आयुक्त ने सहायक आयुक्त को मुख्यालय से संबद्ध करते हुए आठ दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
केस 2
कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध खरीफ बिक्री के मामले में वाराणसी के शैली ट्रेडर्स सहित कई फर्म सिर्फ कागजों पर मिलीं। शैली ट्रेडर्स ने वाराणसी की 126 फर्म को कोडीन सिरप की आपूर्ति की थी। वर्ष 2019 से 2025 तक यहां थोक के 89 लाइसेंस जारी किए गए थे। छह साल के दौरान वाराणसी में तैनात रहे सहायक आयुक्तों और ड्रग इंस्पेक्टरों की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
केस 3
गोंडा में बिना वैध अनुमति के गोदाम में कोडीन सिरप पाए गए। यहां करीब 1.13 करोड़ की सिरप सीज की गई। इसके बाद भी यहां तैनात अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
नकली दवाओं का नेटवर्क भी खत्म किया जाएगा
एफएसडीए उप आयुक्त शशि मोहन गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की सक्रियता का नतीजा है कि कोडीन कफ सीरप नेटवर्क तोड़ दिया गया है। नकली दवाओं का नेटवर्क भी खत्म किया जाएगा। जहां तक कार्रवाई की बात है तो यह शासन स्तर से होगी।