फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: विभागीय ढिलाई से चल रहा नकली दवाओं का कारोबार, 128 FIR, सिर्फ एक निलंबन; इस तरह फैला नेटवर्क

Sat, 25 Jul 2026 08:03 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार विभागीय लापरवाही के कारण जारी है। 128 एफआईआर और 35 गिरफ्तारियों के बावजूद केवल एक अधिकारी निलंबित हुआ। जांच में कोडीन सिरप और नकली दवाओं का व्यापक नेटवर्क सामने आया। एफएसडीए ने अभियान जारी रखते हुए पूरे नेटवर्क को खत्म करने का दावा किया।

विज्ञापन
नकली दवा का कारोबार - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश में हर दिन कहीं न कहीं नकली दवाओं की खेप मिल रही है। इस पूरे नेटवर्क में कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। कोडीन मामले में भी कई अफसरों की लापरवाही मिली थी, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

विज्ञापन


खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम तभी सक्रिय होती है, जब निजी कंपनियों की ओर से उनके कारोबार के प्रभावित होने की शिकायत की जाती है। राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल से नकली दवाएं पूरे प्रदेश में फैल चुकी हैं।

नारकोटिक्स दवाएं भी भरपूर बेची जा रही

कुछ ऐसा ही हुआ था कोडीन कफ सीरप के मामले में भी। दिसंबर 2025 से जनवरी, फरवरी 2026 में चले जांच अभियान में आगरा, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर सहित सभी शहरों में धड़ल्ले से कोडीन सीरप के पहुंचने की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं नारकोटिक्स दवाएं भी भरपूर बेची जा रही है।

यूपी के रास्ते दूसरे राज्यों और नेपाल व बांग्लादेश तक दवाएं जाने की जानकारी एफएसडीए को मिली। इतना ही नहीं एफएसडीए आयुक्त के आदेश को भी सहायक आयुक्त ने धता बता दिया। इसके बाद भी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

विज्ञापन


पूरे अभियान के दौरान करीब 128 एफआईआर दर्ज हुए, 35 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई और मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। विभागीय कार्रवाई देखें तो सिर्फ अमेठी के इंस्पेक्टर कमलेश मिश्रा को निलंबित किया गया।





 

केस 1

एफएसडीए आयुक्त ने कानपुर के सहायक आयुक्त दिनेश कुमार तिवारी को फर्मों की जांच कराने का निर्देश दिया। माहभर बाद भी फर्मों की जांच नहीं कराई गई तो मुख्यालय से गठित टीम ने जांच किया। मौके पर कोडीन कफ सीरप व अन्य नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं मिलीं। आयुक्त ने सहायक आयुक्त को मुख्यालय से संबद्ध करते हुए आठ दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

केस 2

कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध खरीफ बिक्री के मामले में वाराणसी के शैली ट्रेडर्स सहित कई फर्म सिर्फ कागजों पर मिलीं। शैली ट्रेडर्स ने वाराणसी की 126 फर्म को कोडीन सिरप की आपूर्ति की थी। वर्ष 2019 से 2025 तक यहां थोक के 89 लाइसेंस जारी किए गए थे। छह साल के दौरान वाराणसी में तैनात रहे सहायक आयुक्तों और ड्रग इंस्पेक्टरों की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

केस 3

गोंडा में बिना वैध अनुमति के गोदाम में कोडीन सिरप पाए गए। यहां करीब 1.13 करोड़ की सिरप सीज की गई। इसके बाद भी यहां तैनात अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन

नकली दवाओं का नेटवर्क भी खत्म किया जाएगा

एफएसडीए उप आयुक्त शशि मोहन गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की सक्रियता का नतीजा है कि कोडीन कफ सीरप नेटवर्क तोड़ दिया गया है। नकली दवाओं का नेटवर्क भी खत्म किया जाएगा। जहां तक कार्रवाई की बात है तो यह शासन स्तर से होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें