सर्जरी कर निकाली प्रभावित हड्डी
महिला के इलाज के लिए प्रसूति विशेषज्ञ के साथ ही न्यूरोसर्जन, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की एक टीम बनाई गई। रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए डीकंप्रेशन सर्जरी की गई। इसमें रोड़ की हड्डी के पिछले हिस्से यानी लेमिना (कशेरुका की हड्डी का एक हिस्सा) को हटाने के लिए सर्जरी (लैमिनेक्टॉमी) की गई।
इस दौरान महिला के साथ ही पेट में पल रहे शिशु की सुरक्षा भी ध्यान रखा गया। सर्जरी के बाद महिला को तपेदिक रोधी दवाएं दी गई। ऑपरेशन के बाद, रोगी की तंत्रिका संबंधी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान धूण का स्वास्थ्य भी सामान्य बना रहा। इस केस को जर्नल ऑफ ऑस्टेट्रिक एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर में प्रकाशित किया गया है। इसे डॉ. श्रेया रस्तोगी, डॉ. रवि प्रकाश और डॉ. बृजेश पी. ने पेश किया।
टीबी संक्रमित गर्भवती महिलाओं में हर पांचवीं भारतीय
देश में गर्भवती महिलाओं में टीबी का बोझ काफी अधिक है। प्रजनन आयु की महिलाओं में यह मृत्यु के शीर्ष तीन कारणों में से एक है। गर्भवती महिलाओं में टीबी के वैश्विक बोल का 21% हिस्सा भारत में है। सामान्य तौर पर फेफड़ों की टीबी के मामले मिलते हैं, लेकिन अन्य अंगों में टीबी के मामले भी तेजी से आ रहे हैं।
जोनल टास्क फोर्स राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (नॉर्थ जोन) के अध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि 6 हर अंग में हो सकती है टीबी की बीमारी टीबी की बीमारी बाल और नाखून छोड़कर शरीर के हर अंग में फैल सकती है। ऐसे में घर-परिवार में किसी को टीबी हुआ है तो कोई गंभीर समस्या होने पर टीबी जांच भी करानी चाहिए। टीबी का इलाज पूरी तरह से संभाष है। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए निशुल्क इलाज का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।