राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव।
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कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत कांग्रेस ने 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, इसलिए इस बार भी उसे 100 से अधिक सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि, 2017 में यह गठबंधन भाजपा के हाथों सत्ता हासिल नहीं कर सका। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सवाल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि जीत का है। सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस जिन सीटों की मांग कर रही है, वहां उसे अपने मजबूत उम्मीदवारों का विवरण देना होगा। उम्मीदवार की जीत-हार की संभावनाओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरण के आधार पर सीटों पर फैसला होगा। सपा नेतृत्व का मानना है कि सरकार बनाने के लिए प्रत्येक सीट महत्वपूर्ण है। ऐसे में कमजोर उम्मीदवार को मैदान में उतारना गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कांग्रेस के अधिक सीटों पर अड़े रहने की स्थिति में सपा अपने स्तर पर निर्णय ले सकती है।
राजनीतिक हलकों में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद के एनडीए से अलग होने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। दोनों उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं। सपा के एक प्रमुख रणनीतिकार के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ तत्काल संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।