अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत के अनुसार गिरफ्तारी का कारण और आधार अंकित किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी आवश्यक है कि आरोपी को क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ सारवान तथ्य भी हो। केस डायरी से स्पष्ट है कि विवेचक ने अग्रिम अपराध रोकने, मामले के उपरोक्त अन्वेषण, साक्ष्यों को प्रभावित करने व पीड़ित पक्ष को डराने से रोकने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी आवश्यक बताई है। अपराध के उचित अन्वेषण, बरामदगी, साक्ष्य संकलन व आजीवन कारावास से आच्छादित होने के कारण भी गिरफ्तारी का पर्याप्त आधार माना गया।
न्यायालय ने यह भी कहा कि विवेचक ने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई के वाद में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया गया है। आरोपियों को पुलिस प्रपत्रों की प्रतियां लिखित रूप में दी गईं हैं और गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को दी गई है। इसके अतिरिक्त उनका चिकित्सीय परीक्षण भी विधिपूर्ण तरीके से कराया गया है।
सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने वकालतनामा पत्रावली पर लिए जाने की याचना की और मौखिक रूप से रिमांड निरस्त करने की मांग की। अदालत ने वकालतनामा पत्रावली पर लेने की अनुमति दी लेकिन रिमांड खारिज किए जाने की मौखिक आपत्ति निरस्त कर दी। प्रथमदृष्टया न्यायिक रिमांड स्वीकार किए जाने योग्य पाते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्तूबर 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।