शातिर श्रद्धा दुबे ने पुलिस को दस दिनों तक छकाया। श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ करीब 2200 किमी का सफर किया। होटलों व लॉज में ठहरीं। वह आगे आगे चल रही थीं और उनके पीछे-पीछे पुलिस खाक छानती रही। आठ से दस ऐसे ठिकाने हैं जहां से पुलिस के पहुंचने के पांच-छह घंटे पहले ही ये तीनों निकल जाते थे। यही वजह है कि पुलिस की नाकामी की कहानी बढ़ती गई। 11वें दिन जाकर पुलिस उस तक पहुंच सकी।
वारदात की रात यानी 9 अक्तूबर को श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ घायल शिवा को लेकर केजीएमयू पहुंची थीं। फिर यहीं से वह निकल गई थी। लखनऊ से सीधे वह सीतापुर महमूदाबाद होते हुए बहराइच पहुंची। यहां रुपईडीहा बॉर्डर पार कर नेपाल में दाखिल हो गई थी। पुलिस के मुताबिक नेपाल के बुटवल में गई। यहां बिना आईडी वाले एक होटल में रुकी। तभी पुलिस को उसके नेपाल जाने की सूचना मिल गई थी। पुलिस वहां पहुंची जरूर लेकिन उस तक नहीं पहुंच सकी। 16 अक्तूबर को तीनों ने नेपाल छोड़ दिया।
वह गोरखपुर के रास्ते देर रात रायबरेली पहुंची। यहां तीन घंटे तक रुकी। होटल की भी तलाश की लेकिन बिना आईडी होटल नहीं मिल सका। इसलिए वहां से तीनों टैक्सी कर लखनऊ आउटर होते हुए 17 की सुबह आगरा पहुंच गई। एक होटल में रुकी। जिसके फुटेज भी सामने आए। यहां से 18 की सुबह लखनऊ आई और विभूतिखंड इलाके में एक न्यूज एजेंसी को बाइट दी। शाम को जब ये बाइट मीडिया में आई तो पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। क्योकि उनको अपनी नाकामी का एहसास था। साफ था कि श्रद्धा आगे आगे और पुलिस बस पीछे पीछे चल रही है।
14 अक्तूबर को पुलिस के रडार से श्रद्धा गायब हो गई थी। की लोकेशन अगले दिन नेपाल के बुटवल में मिली। 16 अक्तूबर को महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर के चोर रास्ते से यूपी में दाखिल हुई। पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहना और ट्रॉली बैग स्थानीय ड्राइवर को देकर कपड़े के झोले खरीदे। इसके बाद उसी ड्राइवर के साथ नौतनवा पहुंची। वहां से किराये की अर्टिगा से रायबरेली रवाना हो गई।
कानपुर में बदली टैक्सी
लखनऊ में बाइट देने के बाद श्रद्धा ने कमता से नागपुर के लिए टैक्सी बुक की। इस अर्टिका कार में सिर्फ 80किमी प्रति घंटे की ही अधिकतम रिफ्तार थी। लिहाजा कानपुर में इस टैक्सी को छोड़ दिया। कानपुर से दूसरी अर्टिका बुक की। फिर फतेहपुर सतना, आदि शहरों को होते हुए नागपुर पहुंची। वहां पर उसको अंदेशा था कि वह सुरक्षित है। यहां तक पुलिस नहीं आ पाएगी। नागपुर में वह धरी गई। हालांकि इसके पहले तक पुलिस को खूब छकाया।
बॉर्डर पार कर जाना भी बड़ी विफलता
घटना के कुछ ही देर बाद श्रद्धा भाग निकली थी। हजरतगंज पुलिस तब तक कुछ भाप ही नहीं सकी थी। मानो उनको घटना का अंदाजा ही नहीं था जबकि पीड़ित परिवार ने उसी वक्त श्रद्धा व उसके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया था। इसके बावजूद पुलिस सक्रिय नहीं हुई। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। दूसरे दिन तड़के वह नेपाल पहुंच गई। जब केस दर्ज हुआ तब उसकी तलाश शुरू हुई।
श्रद्धा दुबे के हाईप्रोफाइल बनने की कहानी।
- फोटो : अमर उजाला।