शिक्षामित्र संघ ने जताया आभार
सीएम द्वारा सदन में शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने की घोषणा के साथ ही प्रदेश भर के शिक्षामित्रों व उनके परिवार में खुशी का माहौल हो गया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला, महामंत्री सुशील यादव व संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के 1.43 लाख शिक्षामित्र परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। वे और अधिक मनोयोग से शिक्षण कार्य करेंगे।
अनुदेशक भी कई साल से कर रहे थे इंतजार
प्रदेश में जूनियर हाईस्कूल में कला, विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, खेलकूद आदि विषयों में पढ़ाई व प्रशिक्षण देने के लिए 2013-14 में तत्कालीन सपा सरकार ने लगभग 25 हजार अनुदेशकों की तैनाती की थी। इन्हें 7000 रुपये मानदेय पर रखा गया था।
इसके बाद 2017 में इनका मानदेय 1400 रुपये बढ़ाया गया। हालांकि बाद में इसे वापस 7000 रुपये कर दिया गया था। भाजपा सरकार ने नवंबर 2021 में इनका मानदेय दो हजार बढ़ाते हुए 9000 रुपये किया। वहीं अब 9000 से बढ़ाकर 17000 रुपये करने की घोषणा की गई है।
शिक्षामित्र कब क्या हुआ
- 26 मई 1999 को शिक्षामित्र योजना लागू हुई। 1450 रुपये मानदेय।
- 2000-2001 में इनका मानदेय बढ़ाकर 2250 रुपये किया गया।
- अक्तूबर 2005 में मानदेय 2250 रुपये से बढ़कर 2400 हुआ।
- 15 जून 2007 को मानदेय 2400 रुपये से बढ़कर 3000 हुआ।
- 11 जुलाई 2011 को शिक्षामित्रों के दो वर्षीय प्रशिक्षण का आदेश।
- 23 जुलाई 2012 को कैबिनेट ने समायोजन का निर्णय लिया।
- 19 जून 2014 को पहले बैच में 60442 शिक्षामित्रों के समायोजन प्रक्रिया
- 08 अप्रैल 2015 को 77075 शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया
- समायोजन के बाद शिक्षामित्रों का वेतन 35-40 हजार रुपये हुआ।
- 12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समायोजन निरस्त किया।
- 07 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई।
- 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को निरस्त किया।
- 01 अगस्त 2017 में मानदेय 3500 से बढ़कर 10 हजार रुपये हुआ।
(शिक्षामित्रों से मिली जानकारी के अनुसार।)