Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की पूजा, चंद्र दर्शन, चांदनी में खीर रखने की परंपरा निशीथ काल में की जाती है। ऐसे में 25 अक्तूबर की रात ही चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं के साथ आसमान में रहेगा।
आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के मुताबिक इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्तूबर यानी कल मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को दिन में 11:55 से शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 तक रहेगी।
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शरद पूर्णिमा की पूजा, चंद्र दर्शन, चांदनी में खीर रखने की परंपरा निशीथ काल में की जाती है। ऐसे में 25 अक्तूबर की रात ही चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं के साथ आसमान में रहेगा इसलिए खीर रखने की परंपरा और रात की पूजा 25 अक्तूबर को ही होगी। वहीं उदयातिथि और पूर्णिमा का स्नान दान 26 अक्टूबर को होगा।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा पर विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन हर्षण योग उपरांत ब्रज रहेगा। इसके साथ रेवती नक्षत्र शाम 7:22 तक उपरांत अश्विनी नक्षत्र रहेगा। इस दिन चंद्रमा मीन उपरांत मेष राशि में रहेगा और चंद्रोदय सांयकाल 4:47 पर होगा।