जनवरी में होने वाले सम्मेलन में आरएसएस के पंच प्रण सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत संघ का मुख्य फोकस जातियों में बंटे हिंदू समाज को एक मंच पर लाना है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भी घुसपैठ और अन्य हिंदू हितों से जुड़े मुद्दों पर मुखर भूमिका निभा रहे हैं।
बैठक में एसआईआर से जुड़ी कार्यप्रणाली पर भी मंथन हुआ। एसआईआर में कम सक्रियता दिखाने वाले विधायकों को सचेत करने, सरकार, संगठन, संघ के पदाधिकारियों को और सक्रिय करने पर बात हुई। प्रभारी मंत्रियों को जिलों में विभागीय बैठकों के बाद संघ पदाधिकारियों से भी समन्वय बैठक करने जैसे बिंदुओं पर सहमति बनी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में आगामी दिनों में सरकार और संगठन में संभावित फेरबदल पर भी प्रारंभिक रायशुमारी हुई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का चुनाव, मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव, जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श कर शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी है।
सीएम आवास पर बैठक से पहले अरुण कुमार और बीएल संतोष ने भारती भवन (संघ कार्यालय) में कई नेताओं से मुलाकात कर प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति पर फीडबैक लिया। पूर्वी व पश्चिमी यूपी के क्षेत्र प्रचारकों के साथ बंद कमरे की बैठक में शाखाओं के विस्तार, स्वयंसेवकों की सक्रियता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। संघ के मजदूर, शिक्षा, व्यापारिक और अन्य समूहों से मिले फीडबैक को भी सीएम के समक्ष रखा गया, ताकि सरकार जमीनी जरूरतों के अनुसार कार्य कर सके। बैठक में यह भी संकेत मिला कि जल्द ही निगमों, आयोगों और बोर्डों में भाजपा के पुराने व अनुभवी कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जा सकता है।