पिता के पेशे से नहीं पड़ा अंतर
माताओं की नौकरी का किशोरों के वजन से सीधा संबंध है। हालांकि, पिता के मामले में ऐसा नहीं है। जो पुरुष कुशल या फिर उच्च पेशे में काम कर रहे थे उनके बच्चों में 17.4 फीसदी मामले ज्यादा वजन और 10.7 फीसदी मोटापे के मिले। अर्धकुशल-अकुशल समूह वाले पुरुषों के बच्चों में मोटापे और ज्यादा वजन के मामले 10.1 फीसदी थे। बेरोजगार पुरुषों के बच्चों में 12.5 फीसदी मामले मोटापे के थे।
मां की नौकरी ऐसे करती है प्रभावित
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष उपाध्याय के अनुसार किशोरों में मोटापे के पीछे सबसे बड़ी वजह फास्टफूड का ज्यादा सेवन है। ज्यादातर पुरुष काम पर चले जाते हैं और घर में मां बच्चों के खानपान की निगरानी कर लेती हैं। महिला के भी काम पर जाने पर निगरानी कमजोर होती है और बच्चे ज्यादा फास्टफूड खा लेते हैं।
बेटियों में मोटापा ज्यादा
अध्ययन के अनुसार बालिकाओं में मोटापा ज्यादा है। बेटियों के मामलों में 15.7 फीसदी में अधिक वजन और 11.6 फीसदी में मोटापा मिला। बालकों के मामले में अधिक वजन का प्रतिशत 14.5 और मोटापे का 9.4 फीसदी रहा। गांव के मुकाबले शहरों में भी मोटापा ज्यादा मिला।