पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के बाद गंगा नदी में पानी का बहाव तेज होते ही लाशें बहती दिखाई देने लगीं हैं। इससे जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। शवों की निगरानी के लिए नगर पंचायत डलमऊ ने स्टीमर लगा दिया है। इसमें चार सफाई कर्मी के साथ क्षेत्रीय लेखपाल लगाए गए हैं। यहीं नहीं इलाकाई पुलिस के साथ एक प्लाटून पीएसी तैनात की गई है। नदी में शव दिखाई पड़ने पर सफाई कर्मी उसके किनारे लाएंगे और फिर विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पिछले पांच दिन से गंगा का जलस्तर बढ़कर एक मीटर तक पहुंच गया था। पानी का बहाव तेज हुआ तो कई लाशें बहकर आती दिखाईं दी। 31 मई को दो लाशें, जबकि पहली जून को तीन लाशें नदी में बहकर आती दिखीं। नगर पंचायत कर्मियों और पुलिस ने इन शवों को डलमऊ में गंगा किनारे लाकर अंतिम संस्कार कराया। गंगा का पानी तो स्थिर हो गया है, लेकिन पांच शव मिलने के बाद से जिला प्रशासन और नगर पंचायत डलमऊ पूरी तरह से सतर्क हैं।
निगरानी समिति का गठन इसलिए किया गया, ताकि कोई शव आने पर उसका अंतिम संस्कार कराया जा सके। नगर पंचायत ने डलमऊ गंगा नदी में एक स्टीमर लगा रखा है। इसमें चार सफाई कर्मी, क्षेत्रीय लेखपाल बारी-बारी से 24 घंटे शवों की निगरानी कर रहे हैं। इस टीम पर न सिर्फ जिला प्रशासन, बल्कि नगर पंचायत अध्यक्ष बृजेशदत्त गौड़, ईओ अमित कुमार सिंह नजर रख रहे हैं। यही नहीं क्षेत्रीय पुलिस के साथ निगरानी के लिए एक प्लाटून पीएसी लगाई गई है।
महामारी फैलने की आशंका पर गठित की गई समिति
एसडीएम विजय कुमार और निगरानी समिति के नोडल अधिकारी प्रतीत त्रिपाठी ने बताया कि गैर जनपदों से बहकर आने वाले शवों की दुर्गंध से गंगाघाटों पर महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से निगरानी समिति बनाई गई है। इसमें अधिकारियों के साथ जनता से सहयोग अपेक्षित है। जो भी शव बहकर आते हैं, उनका दाह संस्कार निगरानी समिति के माध्यम से कराया जाता है।
पुलिस के साथ पीएसी तैनात : श्लोक कुमार
एसपी श्लोक कुमार ने बताया कि निगरानी समिति की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय पुलिस बल के साथ एक प्लाटून पीएसी लगाई गई है, ताकि नदी में शवों की निगरानी के दौरान किसी कर्मचारी में असुरक्षा की भावना न उत्पन्न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और पीएसी बराबर निगरानी कर रही है।