फिसड्डी जिलों में उन्नाव सहित पांच नाम
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू उन जिलों का ऋण-जमा अनुपात है, जो 40% के न्यूनतम मानक से भी नीचे हैं। इन जिलों में लोग बैंकों में खूब पैसा जमा कर रहे हैं लेकिन बैंक वहां के स्थानीय विकास, व्यापार या किसानों को लोन नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे जिलों में उन्नाव में यह 33.62%, बलिया 35.51%, प्रतापगढ़ 38.05% और आजमगढ़ 38.23% हैं। मऊ जिला भी 39.48% के साथ इसी सुस्त श्रेणी में शामिल है।
छोटे जिलों में बढ़ रही छोटे लोन लेने वालों की संख्या
वरिष्ठ बैंकिंग सलाहकार आरके सेंगर ने बताया कि प्रदेश के छोटे और ग्रामीण जिलों अंबेडकरनगर, अमेठी, अमरोहा, औरैया, बागपत, बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, भदोही में लोन लेने की प्रकृति बड़े शहरों से बिल्कुल अलग है। कुल 75 जिलों में से करीब 45 से 50 जिले छोटे या मध्यम श्रेणी में आते हैं। इन छोटे जिलों में कॉरपोरेट लोन लेने वाले लोग न के बराबर हैं।
यहां लोन लेने वालों की संख्या सबसे अधिक किसान क्रेडिट कार्ड, सूक्ष्म व लघु उद्योग और महिला स्वयं सहायता समूहों में है। जैसे बहराइच (73.75%) और बाराबंकी (70.25%) जैसे छोटे जिलों का सीडी रेशियो बहुत अच्छा है। यानी इन छोटे जिलों में बैंक स्थानीय कृषि, डेयरी और छोटे व्यापार के लिए जमकर लोन बांट रहे हैं, जिससे वहां लोन लेने वाले छोटे ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।