सूखा से त्रस्त बुंदेलखंड में पानी की ट्रेन पहुंचने से पहले ही बृहस्पतिवार को जबरदस्त सियासत छिड़ गई। बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्र महोबा में पानी पहुंचाने के लिए रतलाम से एक खाली ट्रेन झांसी पहुंचने के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक तमाम दलों में जुबानी जंग शुरू हो गई।
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खाली ट्रेन भेजने को बुंदेलखंड के लोगों के साथ भद्दा मजाक बताते हुए झांसी के कांग्रेसियों ने ट्रेन के पास प्रदर्शन किया। वहीं, सपा ने इसे भाजपा का राजनीतिक दांव करार दिया।
अखिलेश सरकार ने केंद्र सरकार की ट्रेन से पानी भेजने की पेशकश को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रदेश में लातूर जैसे संकट नहीं हैं, जो वाटर ट्रेन की जरूरत पड़े। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र से 10 हजार टैंकरों की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
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रेल प्रशासन को दिए गए दस खाली टैंकर
- फोटो : amar ujala
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को कहा था कि बुंदेलखंड के लिए पानी की ट्रेन भेजी जाएगी। लोकसभा में सूखे पर उठे सवाल पर महोबा क्षेत्र को सबसे प्रभावित बताया गया था। इस पर महोबा में रेलवे के जरिये टैंकरों से पानी भेजने के निर्देश जारी किए गए थे।
चर्चा है कि इसी के तहत रेलवे बोर्ड ने मंडल रेल प्रशासन को दस खाली टैंकर उपलब्ध कराए हैं। मालगाड़ी का यह रैक बुधवार को रतलाम से झांसी आया था।
रैक आने के बाद अपर मंडल रेल प्रबंधक ने महोबा के डीएम से बात की थी। मगर उन्होंने अभी पानी लेने से इनकार कर दिया था। महोबा डीएम ने मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर यह बताया है कि अभी वह स्थानीय स्रोतों से ही पानी की पूर्ति कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पानी भेजने की डिमांड करेंगे।
इस कारण टैंकरों को कैरिज एंड वैगन रिपेयर यार्ड में खड़ा कर दिया गया है। रेल अफसरों का भी कहना है कि डिमांड आने पर झांसी से टैंकरों को भरकर संबंधित स्टेशन भेजा जाएगा।
रेलवे ने कहा झांसी ट्रेन पहुंच गई है, मांग पर ही आपूर्ति करेंगे
- फोटो : अमर उजाला
पानी आपूर्ति के लिए रतलाम से झांसी पहुंची ट्रेन पर रेलवे का कहना है कि बुंदेलखंड इलाके में भाजपा सांसदों ने लातूर की तरह बुंदेलखंड में भी ट्रेन से पानी पहुंचाने की मांग की थी।
इसे ही ध्यान में रख पानी सप्लाई करने वाली 10 टैंकर वाले कोच को ट्रेन भेज दी गई है। बिना पानी के टैंकर भेजे जाने पर रेलवे ने तर्क दिया है कि रेलवे के पास पानी नहीं है, सिर्फ एक जगह से दूसरे जगह पानी की आपूर्ति ट्रेन से की जाती है।
इस ट्रेन से पांच लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा सकती है। 50 हजार लीटर पानी एक कोच में आता है। 40 ट्रक के बराबर रेलवे के 10 कोच हैं। रेलवे बोर्ड के ट्रैफिक मेंबर ने कहा कि हमने झांसी में ट्रेन खड़ी कर दी है। राज्य सरकार की मांग पर ट्रेन से पानी पहुंचाया जाएगा।
अखिलेश बोले, पानी की ट्रेन से ज्यादा टैंकरों की जरूरत
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती को पत्र लिखकर कहा है कि बुंदेलखंड को पानी की ट्रेन से ज्यादा टैंकरों की जरूरत है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह ट्रेन के बजाय प्रदेश को 10 हजार टैंकर मुहैया कराए। जिससे बुंदेलखंड के सभी इलाकों में पानी की आपूर्ति की जा सके।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि टैंकर उपलब्ध कराने के लिए वह अधिकारियों को निर्देशित करें। जहां तक पानी का सवाल है तो बुंदेलखंड के जलाशयों में अभी पर्याप्त पानी है। अगर भविष्य में पानी की ट्रेन की जरूरत होगी तो प्रदेश सरकार समय रहते केंद्र सरकार से मांग करेगी।
ट्रेन वापस भेजने की मांग हास्यास्पद
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर प्रदेश सरकार द्वारा पानी की ट्रेन के विरोध को अनुचित करार दिया है। साथ ही कहा है कि यह ट्रेन बुंदेलखंड के सांसदों की मांग पर भेजी गई है। इनमें उमा भारती खुद भी शामिल हैं, क्योंकि उनका संसदीय क्षेत्र ललितपुर व झांसी भी बुंदेलखंड में ही आता है।
प्रदेश द्वारा पानी की ट्रेन से पानी न लेना और इसे वापस भेजने की बात करना हास्यास्पद है। भारती ने लिखा है, ‘आप बुंदेलखंड के सभी डीएम को ट्रेन से भेजे गए पानी का सदुपयोग करने के लिए कहें एवं प्यासे लोगों तक पानी पहुंचाएं।’
चार दिन में आता है एक टैंकर, बैलगाड़ी से ढो रहे पानी
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पुलवारा (ललितपुर)। यूपी सरकार भले ही बुंदेलखंड में पानी की किल्लत से इन्कार कर रही हो, लकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसकी एक बानगी ग्राम पंचायत कठवर रमपुरा में देखी जा सकती है। यहां किसान बैलगाड़ी से पानी ढो रहे हैं। हालांकि, पानी की सहूलियत के लिए टैंकर भी लगाया गया है, लेकिन वह चार दिन के अंतराल पर आता है।
श्रेय लेने की होड़ में आमने-सामने
दरअसल, सारा मामला श्रेय लेने की होड़ का है। राज्य सरकार नहीं चाहती थी कि पानी की एक-दो ट्रेन भेजकर केंद्र सरकार सूखे से निपटने में मदद करने का श्रेय ले।
वहीं, केंद्र सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सूखा प्रभावित लोगों को राहत उसकी मदद से मिल रही है। इसी क्रेडिट के लिए आम लोगों को राहत पहुंचाने के मुद्दे को भूलकर दोनों सरकारें आमने-सामने हैं।