निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना में हेराफेरी की शिकायतों पर लखनऊ और गोंडा के 21 अस्पतालों में मंगलवार को छापे मारे गए। कार्रवाई में आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी मरीजों से वसूली और पैकेज में हेराफेरी का खुलासा हुआ। पता चला कि जरूरत के बिना ही मरीजों को आईसीयू में रखा जा रहा है।
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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों में कार्ड धारकों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) को कई निजी अस्पतालों की मनमानी की शिकायतें मिलीं।
बिना जरूरत के मरीजों को आईसीयू में कर रहे भर्ती
लखनऊ के चंद्रावती हॉस्पिटल, दुबेजी हॉस्पिटल, जीवक हॉस्पिटल, काइंड हॉस्पिटल, मेडलाइफ रिसर्च एंड ट्रॉमा सेंटर और एसआर हॉस्पिटल में गड़बड़ियां मिली हैं। अस्पतालों के रिकॉर्ड, मरीजों के बयान और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जांच की गई। जांच में कुछ मरीजों को सामान्य बीमारी के बावजूद रिकॉर्ड में आईसीयू और एचडीयू में भर्ती दिखाने के मामले सामने आए। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि अस्पतालों ने अधिक भुगतान पाने के लिए इलाज के पैकेज में हेरफेर किया। इलाज कैशलेस होने के बावजूद कुछ मरीजों से पैसे लेने की शिकायतें भी मिलीं। जांच में ड्यूटी रोस्टर में गड़बड़ी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और गंभीर मरीजों के इलाज में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी भी पाई गई।
आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायत कहां करें?
- फोटो : Amar Ujala AI
गोंडा में सुधा न्यूरो एंड ट्रॉमा सेंटर, एपेक्स हॉस्पिटल, कृष्णा केयर सेंटर, जीवन दीप हॉस्पिटल, गायत्री हॉस्पिटल, सनराइज हॉस्पिटल ऑर्थो एंड मैटरनिटी सेंटर, किरण हॉस्पिटल, फैमिली हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, नूर हॉस्पिटल, कृष्णा हॉस्पिटल, श्री कृष्ण कुमार मौर्य मेमोरियल लाइफ केयर हॉस्पिटल, नारायण हॉस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर और अवध हॉस्पिटल का निरीक्षण किया गया।
कई अस्पतालों में आयुष्मान योजना से संबंधित जरूरी जानकारी, टोल फ्री नंबर और शिकायत के लिए संपर्क सूत्र प्रदर्शित नहीं मिले। कुछ अस्पतालों में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण और संक्रमण से बचाव के इंतजामों में कमी मिली। एक अस्पताल में पैथोलॉजी लैब नहीं थी और मान्यता प्राप्त लैब से अनुबंध भी नहीं मिला। वहीं, एक अन्य अस्पताल में बेसमेंट में ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू संचालित होने की बात सामने आई। अग्निशमन उपकरणों पर भी जरूरी जानकारी नहीं मिली। राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत घटिया इंप्लांट लगाने की शिकायतें भी सामने आईं।
लिस्ट से बाहर होंगे, वसूली भी होगी
अस्पतालों को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि क्यों न अनियमितताओं के आधार पर उनको पंजीकरण सूची से बाहर कर दिया जाए और वित्तीय नुकसान की वसूली की कार्रवाई की जाए। अस्पतालों के जवाबों की समीक्षा के बाद नियमानुसार जुर्माना लगाने, योजना से बाहर करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने पर निर्णय लिया जाएगा।-अर्चना वर्मा, सीईओ साचीज