गर्भावस्था में बहुत सी महिलाएं साफ-सफाई (हाइजीन) का जरूरत से ज्यादा ध्यान देने लगती हैं। ऐसी कुछ महिलाएं बाद में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से ग्रसित हो जाती हैं। ओसीडी को अक्सर सिर्फ बार-बार हाथ धोने या चीजों को व्यवस्थित रखने की आदत ही समझा जाता है, लेकिन यह एक जटिल मानसिक रोग है।
डॉ. सुजीत के अनुसार, ओसीडी पीड़ितों के बारे में यह माना जाता था कि उनमें आत्महत्या की प्रवृति कम होती है, लेकिन कई अध्ययनों से पता चला है कि अन्य मरीजों की तुलना में ओसीडी पीड़ितों में अवसाद का खतरा अधिक होता है। ऐसे में इनमें आत्महत्या करने का भी खतरा अधिक है। ऐसे मरीजों में लगातार इलाज कराने की जरूरत पड़ती है। ओसीडी के कुल मरीजों में 55-65 प्रतिशत को लगातार इलाज कराते रहना जरूरी होता है। बहुत कम मामले होते हैं, जो कम समय के इलाज में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
सामान्य लक्षण : गंदगी को लेकर अधिक सतर्क रहना, बारबार हाथ धोना, दरवाजा चेक करना, नहाना।
असामान्य लक्षण : चीजों को एक ही तरीके से रखना और करना। परिजन और भगवान के खिलाफ अनैतिक विचार आना। होल्डिंग डिसऑर्डर (फालतू की वस्तुओं को भी एकत्रित करना)। आपत्तिजनक या वर्जित यौन विचार या धर्म से संबंधित निंदात्मक विचार आना।
जैविक कारक : सेरोटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ना, आनुवंशिक, सिर में गंभीर चोट लगने के कुछ साल बाद।