इसलिए कुर्क हुई थी कोठी
गाजीपुर प्रशासन ने इसे बेनामी संपत्ति मानते हुए कार्रवाई की थी। आरोप था कि अफजाल ने संगठित अपराध से अर्जित धन से 1998 में संपत्ति अपनी पत्नी फरहत अंसारी के नाम लीज पर ली थी। परिवार ने कुर्की के खिलाफ जिला जज कोर्ट और फिर एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में अपील की। स्पेशल कोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को कुर्की आदेश रद्द कर संपत्ति मुक्त करने का आदेश दिया।
शासन की अपील पर उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को पांच सप्ताह में मामले के निस्तारण का निर्देश दिया। इसके बाद जिलाधिकारी गाजीपुर अनुपम शुक्ला ने 18 अगस्त को कुर्की समाप्त करने का आदेश जारी किया। बुधवार को नगर निगम ने कोठी की चाबी फरहत अंसारी को सौंप दी।
ओटीएस में ब्याज-सरचार्ज माफ
गृहकर और जलकर के बकायेदारों के लिए 15 अगस्त से एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू है। यह 15 दिसंबर तक चलेगी। योजना के तहत बकाया जमा करने पर ब्याज और सरचार्ज में छूट मिलेगी। इसके तहत कोठी के गृहकर पर लगा 16,601 रुपये ब्याज और जलकर पर 7,912 रुपये सरचार्ज माफ हो सकता है।
अन्य भवनों से बकाया कर की वसूली होती
जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता उत्कर्ष राय ने बताया कि जिस तरह अन्य भवनों से बकाया कर की वसूली होती है उसी तरह यहां पर बिल भेजकर नियमानुसार कर की वसूली की जाएगी।