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यूपी: प्रदेश में मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद एक अक्टूबर से होगी शुरू, 30 अगस्त तक होगी जियो टैगिंग

Tue, 13 Aug 2024 08:54 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Procurement of maize and jowar: यूपी में मक्का, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाजों की सरकारी खरीब एक अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। इसके लिए पंजीकरण एक अगस्त से शुरू हो गए थे। 
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मक्के की खरीद एक अक्टूबर से। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद एक अक्टूबर से शुरू होगी। इसकी तैयारियों के संबंध में खाद्य एवं रसद विभाग ने समय-सरिणी जारी की है। जिसके अनुसार कृषकों को स्वयं या जनसुविधा केंद्र आदि के माध्यम से पंजीकरण कराने के लिए पंजीकरण 1 अगस्त से प्रारंभ है। वहीं केंद्रों की जियो टैगिंग 30 अगस्त तक, धन का आंकलन व उपलब्धता, बोरे की उपलब्धता, स्टाफ की तैनाती हैंडलिंग व परिवहन ठेकेदारों की नियुक्ति, ई-पॉप डिवाइस की उपलब्धता संबंधी व्यवस्था 15 सितंबर तक कर ली जाएगी। वहीं अन्य व्यवस्थाएं भी 15 सितंबर तक कर ली जाएंगी।

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उत्तर प्रदेश की चार सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार
 उत्तर प्रदेश की चार सहकारी चीनी मिलों को बेहतर प्रबंधन और दक्षता के लिए राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 10 अगस्त को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ के तत्वाधान में आयोजित ‘चीनी उद्योग संगोष्ठी एवं राष्ट्रीय दक्षता पुरस्कार 2022-23’ समारोह में दिया। इस उपलब्धि को प्रदेश के सहकारी चीनी उद्योग के लिए एक बड़ा सम्मान माना जा रहा है, जो उनके बेहतर प्रबंधन और कार्यक्षमता का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रदेश गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी भी मौजूद थे।

लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि पुरस्कृत चीनी मिलों में रमाला चीनी मिल को अधिकतम गन्ना पेराई, स्नेहरोड चीनी मिल को तकनीकी दक्षता, अनूपशहर चीनी मिल को गन्ना विकास और गजरौला चीनी मिल को वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 23 सहकारी चीनी मिलें संचालित हो रही हैं, जिनकी कुल दैनिक गन्ना पेराई क्षमता 65,375 टन है।वर्ष 2017 और वर्ष 2022 में प्रदेश में लोकप्रिय सरकार के गठन के बाद सहकारी चीनी उद्योग को मजबूती प्रदान करने के लिए कई योजनाएं लागू की गईं, जिनमें तकनीकी उच्चीकरण और क्षमता विस्तार शामिल हैं। इन प्रयासों के फलस्वरूप, सहकारी चीनी मिलों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

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