विभागीय सूत्रों की मानें तो विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने करीब 13 निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायत की है। ये अस्पताल एजेंसी के रडार पर हैं। इनकी दो स्तरीय जांच शुरू की गई है। एक तो शिकायत के आधार पर संबंधित शिकायतकर्ता और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। दूसरी तरफ शिकायतों की वास्तविकता का अध्ययन करने के लिए गोपनीय तरीके से भी जांच टीम उतारी गई है।
कितने अस्पतालों पर हुई कार्रवाई
प्रदेश में आयुष्मान के तहत पंजीकृत किए गए अस्पतालों में रुपये मांगने, इलाज में आनाकानी करने सहित विभिन्न आरोपों में अब तक 410 की संबद्धता खत्म की गई है। इसी तरह 97 को निलंबित किया गया और 68 का भुगतान रोका गया। इसी तरह विभिन्न अस्पतालों में 3.44 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत 2949 सरकारी और 2885 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। पंजीयन के मामले में देश में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है।
प्रदेश में 21 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। योजना के तहगत राज्य के सरकारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके आश्रित परिजनों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलती है। सरकारी अस्पतालों में बिना किसी वित्तीय सीमा के कैशलेस उपचार जबकि आयुष्मान योजना में पंजीकृत निजी अस्पताल में हर लाभार्थी को पांच लाख प्रति वर्ष की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलती है। नवंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में 904785 कर्मचारी और 650259 पेंशन को शामिल किया गया है। इसमें 981261 लाभार्थियों को स्टेट हेल्थ कार्ड कारी कर दिया गया है। अन्य का बन रहा है। नवंबर माह तक हेल्थ कार्ड से 68577 लाभार्थियों ने उपचार लिया। हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से प्रदेश में 22 लाख कर्मचारी और पेंशन भोगी होने का दावा किया जाता है। इसी तरह प्रदेश में करीब आठ करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया है।