यूपी की बिजली व्यवस्था।
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बैठक के दौरान रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा की गई। निदेशकों एवं मुख्य अभियंताओं ने राजस्व वसूली, लाइन हानियां कम करने तथा थू्र-रेट आदि बढ़ाने के अब तक के प्रयासों की जानकारी दी। निलंबन से लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने तक की जानकारी दी गई। यह भी कहा गया कि इस मुद्दे बड़ा फैसला लेने की जरूरत है। कुछ अधिकारियों ने उड़ीसा में टाटा पावर के मॉडल का अध्ययन करने का भी सुझाव दिया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस साल पावर कार्पोरेशन को 46130 करोड़ रुपये सरकार से सहयोग की जरूरत पड़ी है। अगले वर्ष करीब 50-55 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
घाटे से उबरने को लेकर सभी के राय मशविरा लिया जा रहा है। उपभोक्ताओं और निगम में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हितों को किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।- डा. आशीष कुमार गोयल, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन ।
संगठनों ने शुरू किया विरोध
विद्युत वितरण निगमों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालित करने की तैयारी की भनक लगते ही ऊर्जा संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि घटा क्यों हुआ ? इसकी पड़ताल की जरूरत है। 24 साल में 77 करोड़ से घटा 1.18 लाख करोड़ पहुंच गया। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने खुली डिबेट की चुनौती भी दी है। इसी तरह उत्तर प्रदेश विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने भी निजीकरण पर आपत्ति जताई है।