यूपी में बिजली के निजीकरण, बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में किसानों को संगठित व आंदोलन करने पर चर्चा करने के लिए क्रांतिकारी किसान यूनियन की राज्य कमेटी की मंगलवार को वर्चुअल बैठक हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दर्शन पाल ने बताया कि बिजली के निजीकरण का विरोध दिल्ली सीमाओं पर चले किसान आंदोलन का मुख्य मुद्दा रहा हे। यूपी सरकार बिजली के निजीकरण के जनविरोधी फैसले को वापस ले।
उन्होंने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया कि बिजली कर्मचारियों द्वारा 22 जून को लखनऊ में बुलाई गई बिजली महापंचायत में यूनियन बढ़-चढ़कर भागीदारी करेगी। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित 24 जून को साझा विरोध-प्रदर्शन में सभी जिलों में यूनियन भागीदारी करेगी। बिजली के निजीकरण, बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में किसानों -खेतिहर मजदूरों को जागरूक, संगठित और आंदोलित करने के लिए यूनियन के पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं को गांवों में चौपाल-पंचायतें करने और मोर्चा द्वारा जारी पर्चा वितरण में जुटने का फैसला लिया।
बैठक में किसान नेताओं ने कारपोरेशन द्वारा बिजली दरों में 45 प्रतिशत तक वृद्धि कर गांवों में बिजली दर आठ रुपये तक बढ़ाने के प्रस्ताव को यूपी के किसानों-मजदूरों और तमाम गरीब तबकों के साथ बड़ा धोखा बताया। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत, रामनयन यादव, बलवंत यादव, नगेन्द्र चौधरी, रामरतन, उपेन्द्र सिंह पटेल, गरीब राजभर, एकादशी यादव, दिनेश कुमार आदि मौजूद थे।