शासन ने ग्राम पंचायतों और राजस्व ग्रामों के आंशिक पुनर्गठन के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। जिला पंचायत राज अधिकारी सदस्य सचिव और मुख्य विकास अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत सदस्य होंगे। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि डीएम अपने स्तर से यह भी सुनिश्चित कर लें कि किसी जिले में नगरीय निकाय के सृजन या सीमा विस्तार के बाद प्रभावित विकास खंड की संशोधित अधिसूचना जारी होने से न रह गई हो।
प्रदेश में पंचायत चुनाव तक नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम के सृजन और सीमा विस्तार पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से नगर विकास विभाग को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। इसमें कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होंगे।
ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के निर्वाचन का कार्यकाल अगले साल क्रमशः 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। पंचायतों के लिए मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कराया जाना प्रस्तावित हैं, जिसमें लगभग छह महीने का समय लगेगा।
जारी शासनादेश में कहा गया है कि विभिन्न जिलों मे नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम के सृजन व सीमा विस्तार की कार्यवाही की गई है या वर्तमान में चल रही है। ऐसी स्थिति में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बाधा पैदा होगी। ग्राम पंचायतों के परिसीमन, वार्डों के निर्धारण, पिछड़ी जाति की जनसंख्या का निर्धारण, श्रेणीवार जनसंख्या के आंकड़े अपडेट करने के बाद आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होगी। पंचायतों और नगर निकायों के क्षेत्रों में परिवर्तन होने से निर्वाचन संबंधी कामों पर व्यवधान पैदा होना संभावित है। इसलिए पंचायत चुनाव-2026 होने और ग्राम पंचायतों के संगठित होने तक नगरीय निकायों के सृजन एवं सीमा विस्तार को स्थगित रखने के लिए यथोचित कार्यवाही की जाए।