प्रदेश सरकार विधानसभा चुनाव से पहले कोविड महामारी के जोखिम भरे दौर में अपने जान की परवाह छोड़कर आम लोगों की ट्रेसिंग, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट व अन्य तमाम तरह से सहयोग करने वाले फील्ड लेवल फ्रंट लाइन वर्कर के लिए प्रोत्साहन राशि का एलान कर सकती है। उच्च स्तर पर इस संबंध में गंभीरता पूर्वक विचार हो रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में निर्णय होना बाकी है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोविड काल में महामारी के दौरान लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर लौटे थे। समूह में आने की वजह से सभी के रजिस्ट्रेशन, क्वारंटीन सेंटर में रुकने की व्यवस्था, वहां जांच, इलाज, भोजन का प्रबंध व क्वारंटीन अवधि बीतने के बाद उनके घरों को पहुंचाने का काम किया जाना था। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड सर्विलांस, कांट्रैक्ट ट्रेसिंग तथा कोविड मरीजों को मेडिसिन किट उपलब्ध कराने से लेकर निगरानी का काम किया जाना था। ये सभी काम बहुत अच्छी तरह से संपन्न हुए, जिसकी देश-दुनिया में तारीफ हुई। 35 लाख कर्मियों की स्किल मैपिंग की गई, जिससे आपदा के दौरान रोजगार की व्यवस्था में सहयोग मिला। इसमें फील्ड कर्मियों की उल्लेखनीय भूमिका रही।
अधिकरी ने बताया कि इसमें राजस्व, प्रशासन, पंचायती राज, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, ग्राम विकास, बाल विकास एवं पुष्टाहार सहित कई विभागों के फील्ड कर्मियों ने दिन-रात एक कर काम किया। बड़ी संख्या में कर्मियों को जान गंवानी पड़ी। कोविड की तीसरी लहर और ओमिक्रान वैरिएंट की बढ़ती संवेदनशीलता के मद्देनजर इन कर्मियों की भूमिका फिर अहम हो गई है। अधिकारी ने बताया कि कोविड काल में बिना छुट्टी व साप्ताहिक अवकाश दिन-रात काम करने वाले कर्मी प्रोत्साहन राशि की मांग करते रहे हैं। सरकार इन कर्मियों का उत्साह बनाए रखने के लिए इस मांग पर विचार कर रही है। हालांकि इसका क्या स्वरूप हो व कितनी राशि हो इस पर निर्णय बाकी है। इस प्रस्ताव के दायरे में लाखों की संख्या में कर्मी आएंगे।