मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा
इससे अभियंताओं को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई गंभीर मानसिक तनाव में हैं। इस दौरान सेवानिवृत्त दलित अभियंताओं को पेंशन लाभ से वंचित रखने के मामले पर भी चर्चा की गई। पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य लाभ रोकने के मामले में प्रबंधन की निंदा की गई। तय किया गया कि पूरे प्रकरण की सिलसिलेवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा।
अभियंताओं ने मांग की कि उत्पीड़न बंद करके सेवानिवृत्त अभियंताओं का तत्काल सभी तरह का भुगतान किया जाए। अभियंताओं ने कहा कि जब भी ऊर्जा निगमों पर संकट आया है दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं ने घंटों अतिरिक्त काम करके संकट से उबारने का काम किया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होंगे, जिसकी जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन की होगी। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, पीएम प्रभाकर, राम शब्द, हरिश्चंद्र वर्मा, मुकेश बाबू, पूरन चंद, अनिल कुमार, वाईएल कनौजिया, अरिजीत आदि ने संबोधित किया।
हाईकोर्ट से बहाली के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त
बैठक में दलित अभियंता मुकेश बाबू के प्रकरण को गंभीर उदाहरण के रूप में उठाया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि अभियंता के विरुद्ध किसी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं था। फिर भी उन्हें निलंबित किया गया। जिस काम के लिए उन्हें निलंबित किया गया। उस स्थान पर वह सिर्फ 21 दिन कार्य किए थे।
इस निलंबन के जरिए उनकी मुख्य अभियंता पद की पदोन्नति रोकी गई। अभियंता ने उच्च न्यायालय की शरण ली। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त कर लिया गया तथा उनकी दो वेतन वृद्धियां भी रोक दी गईं। सवाल उठाया कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उनकी बहाली हुई तो निलंबन अवधि के आधे वेतन की जब्ती तथा दो वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई किस आधार पर की गई?