ग्रेटर नोएडा शाहबेरी में खसरा नंबर 288 के लिए 3 मई, 2018 को गौरव चतुर्वेदी को दो किलोवाट का अस्थाई कनेक्शन (टीसी-55) जारी किया गया था। मौजूदा समय में खसरा नंबर 288, 289 व 302 पर 96 मकानों (डुप्लेक्स) की टाउनशिप खड़ी है।
केस-2
शाहबेरी में ही अनस चौधरी को अस्थाई कनेक्शन संख्या टीसी-114 के जरिए प्लॉट नंबर बी-2 खसरा नंबर 116 के लिए 2 किलो वाट का कनेक्शन 7 सितंबर, 2019 को जारी किया गया। वर्तमान में इस भूमि पर 6 मंजिल की 30 फ्लैट वाली इमारत खड़ी है।
केस-3
7 जुलाई, 2021 को अमजद खान को 2 किलोवाट का अस्थाई कनेक्शन जारी किया गया था। यहां पर पांच मंजिला इमारत का निर्माण चल रहा है। मौके पर लगे मीटर में अधिकतम भार 6.2 वाट किलो वाट तथा खपत 1135 यूनिट पाई गई।
केस-4
गौतमबुद्धनगर के चिपयाना खुर्द तिगरी में इरशाद को अस्थाई कनेक्शन के जरिए 2 किलोवाट का कनेक्शन 7 मार्च, 2020 को जारी किया किया गया। इस परिसर में 4 मंजिला 28 फ्लैट वाली इमारत पाई गई।
ये तो बानगी है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा में दो वाट का अस्थाई कनेक्शन लेकर मल्टीस्टोरी व टाउनशिप तैयार कराने के सैकड़ों मामले प्रकाश में आए हैं। जरूरत से कम भार का कनेक्शन देने के इस खेल से पावर कॉर्पोरेशन को 100 करोड़ से ज्यादा की चपत का खुलासा हुआ है। कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा मुख्यालय से भेजी गई टीम की जांच रिपोर्ट में मामला सामने आया है।
रिपोर्ट के आधार पर अभी सिर्फ 23 इंजीनियर ही प्रबंधन के रडार पर हैं, लेकिन जांच का दायरा बढ़ने पर तमाम बड़ें अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। बिजली कर्मियों व बिल्डर्स की साठगांठ से हो रहे इस खेल में बहुत सारे अस्थाई कनेक्शनों का विवरण तक गायब कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार सिर्फ एक विद्युत वितरण खंड ग्रेटर नोएडा की जांच में ही करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सभी वितरण खंडों की जांच रिपोर्ट के सामने आने पर एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
मीटर रीडिंग में भी अनियमितता
रिपोर्ट के अनुसार इन कनेक्शनों की न तो प्रतिमाह रीडिंग कराकर बिल बनाए गए और समयावधि विस्तार के समय बिना मीटर रीडिंग देखे और अधिकतम भार का संज्ञान लिए न्यूनतम राशि जमा कराकर या मीटर जला दिखाकर समयावधि विस्तार कर दिया गया।
अस्थायी कनेक्शन संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं हैं। शुरुआती जांच में दोषी पाए गए अभियंताओं को स्थानांतरित करते हुए चार्जशीट दी गई है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एम. देवराज, अध्यक्ष, उप्र. पावर कॉर्पोरेशन