ज्यादा लाइन हानियों की आड़ में दरें बढ़वाने की मुहिम में जुटी बिजली कंपनियों को झटका लगा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मंगलवार को बिजली कपंनियों के 2020-21 से 2024-25 तक के बिजनेस प्लान को हरी झंडी देते हुए 2020-21 में 11.54 लाइन हानियों की ही मंजूरी दी है जबकि टैरिफ प्रस्ताव में चालू वित्तीय वर्ष में 17.96 फीसदी लाइन हानियों का दावा करते हुए 3500 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया गया है।
इसी आधार पर बिजली कंपनियां दरें बढ़वाने की मुहिम में जुटी थीं। लाइन हानियां कम अनुमोदित किए जाने से बिजली दरों में बढ़ोतरी के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। बिजनेस प्लान को हरीझंडी मिल जाने के बाद नई बिजली दरों के एलान का रास्ता भी साफ हो गया है। नियामक आयोग जल्द ही टैरिफ आर्डर जारी कर सकता है।
नियामक आयोग की ओर से मध्यांचल, पूर्वांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम व केस्को के बिजनेस प्लान को मंजूरी दे दी गई। आयोग ने 2020-21 से 2024-25 तक वर्षवार बिजली की अधिकतम मांग, उपभोक्ताओं की संख्या, कनेक्टेड लोड, आपूर्ति की जाने वाली बिजली की मात्रा आदि का अनुमोदन कर दिया है। अनुमोदित किए गए बिजनेस प्लान के अनुसार 2024-25 तक प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 30,819 मेगावाट होगी।
अगले पांच वर्षों में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 3,06,98,157 से बढ़कर 3,49,52,698 हो जाएगी। कनेक्टेड लोड 77592775 किलोवाट एवं विक्त्रस्य 116414 एमयू को अनुमोदित किया गया है। आयोग ने इस साल के लिए 11.54 प्रतिशत, 2021-22 में 11.08 प्रतिशत, 2022-23 में 10.67 प्रतिशत, 2023-24 में 10.31 प्रतिशत तथा 2024-25 में 9.95 प्रतिशत लाइन हानियां अनुमोदित की हैं।
उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए आयोग ने बिजली कंपनियों को राज्य सरकार के अनुमोदन के साथ पारदर्शी रूप से सब्सिडी के ट्रांसफर के लिए स्कीम तैयार करके 1 अप्रैल 2022 से लागू करने को कहा है। सब्सिडी डीबीटी के जरिये देने की तैयारी है इसलिए शत प्रतिशत मीटरिंग पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए रोडमैप तैयार करके इस वित्तीय वर्ष के अंत तक आयोग में दाखिल करने को कहा गया है।
आयोग ने खराब मीटरों के बदलने तथा सभी नए कनेक्शन प्री-पेड या स्मार्ट मीटर के जरिये ही देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगले एक साल के भीतर शतप्रतिशत फीडर मीटरिंग एवं वितरण ट्रांसफार्मर मीटरिंग सुनिश्चित करने को कहा है। बिजली कंपनियों को कोयला आधारित तापीय परियोजनाओं के साथ कोई नया दीर्घकालीन विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।