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यूपी: खुद को एटीएस अफसर बताकर कारोबारी की पत्नी को किया डिजिटल अरेस्ट, ऐंठे 90 लाख रुपये; दो पकड़े गए

Mon, 02 Mar 2026 07:39 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में ट्रांसपोर्ट कारोबारी की पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह के दो आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार किए गए। ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग का झांसा दिया था। गिरोह का मास्टरमाइंड फरार है और उसकी तलाश जारी है।

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डिजिटल अरेस्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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लखनऊ में ट्रांसपोर्ट कारोबारी की पत्नी वीना बाजपेयी को डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये ऐंठने वाले गिरोह के दो लोगों को साइबर क्राइम पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, गिरोह का मास्टरमाइंड फरार चल रहा है। आरोपियों ने वीना को कॉल खुद को एटीएस में तैनात इंस्पेक्टर बताते हुए उन पर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बताया था।

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इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने बताया कि पकड़े गए आरोपी राजस्थान में सीकर के थोई निवासी जितेंद्र यादव और सीकर के चीपलाटा में रहने वाला मनोज यादव है। मामले में पुलिस गिरोह के तीन सदस्य गोरखपुर में पिपराइच के मयंक श्रीवास्तव, गाजियाबाद के निवाड़ी के रहने वाले इरशाद और दिल्ली के प्रेमनगर निवासी मनीष कुमार श्रीवास्तव को जेल भेज चुकी है। गिरोह का मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।






 

जयपुर और तमिलनाडु से गिरोह का हो रहा संचालन

गिरोह का मास्टरमाइंड जयपुर में रहता है। वह जयपुर और तमिलनाडु से पूरे गिरोह को चला रहा है। इंस्पेक्टर के मुताबिक पकड़े गए जितेंद्र ने पूछताछ में पहले खुद को निर्दोष बताया । उसने कहा कि गिरोह के मास्टर माइंड ने उसे रुपये के लालच और डरा धमका कर गिरोह में जोड़ा था।

इसी तरह मनोज ने भी अपने आप को सिर्फ सहयोगी बताया। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों ने बताया कि वे गिरोह के एक और सदस्य वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर बैंक खातों का प्रबंध और ठगी की रकम में लेने देन का काम देखते थे। आरोपियों ने वैभव को बचाने के लिए ही पहले झूठ बोला था।

 

खुद ठगी नहीं करता है मास्टरमाइंड

इंस्पेक्टर के मुताबिक जितेंद्र ने उन्हें बताया उनके गिरोह के लोग डिजिटल अरेस्ट के अलावा अन्य तरीकों से भी लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। कुछ मामलों में तो वे पहले पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए खुद को विश्वसनीय संस्था का कर्मी बताकर ठगी करते हैं। ठगी मास्टरमाइंड नहीं करता है, बल्कि वह सिर्फ लोगों का आदेश देता है। ठगी में दूसरे के दस्तावेजों के प्रयोग से खोले गए खातों का प्रयोग होता है।

 

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डिजिटल अरेस्ट करने के बाद मिटा देते हैं साक्ष्य

ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने के बाद मोबाइल में पड़ा सिम तोड़कर फेंक देते हैं। साथ ही चैट भी डिलीट कर देते हैं। ठग बड़े पैमाने पर श्रमिकों को रुपये का लालच देते हैं। फिर उन्हीं के दस्तावेजों के जरिये सिम ले लेते हैं। इतना ही नहीं मास्टरमाइंड पकड़ में ना आए इसलिए वह समय-समय पर अपनी लोकेशन बदलता रहता है।
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