अपनी लेटलतीफी और हीलाहवाली के लिए देश भर में कुख्यात यूपी पुलिस ने एक और मामले में सूबे की बदनामी करवा दी है।
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट रिपोर्ट फाइल करने को लेकर यूपी पुलिस पर सवालिया निशान लगा दिया है।
विदेश मंत्रालय का दावा है कि यूपी की पुलिस पासपोर्ट रिपोर्ट देने में हरियाणा पुलिस से भी पीछे है।
यानी हरियाणा पुलिस 45 दिन में पुलिस रिपोर्ट फाइल कर देती, लेकिन यूपी पुलिस को इस काम के लिए 60 दिन लगते हैं।
यूपी पुलिस का यह हाल तब, जब तमाम जिले की पुलिस और पासपोर्ट विभाग ऑनलाइन हो चुके हैं।
21 दिन में देनी होती है रिपोर्ट
पासपोर्ट विभाग ने 21 दिन में पुलिस रिपोर्ट फाइल करने की समय सीमा तय की है। यूपी के कुछ जिलों को छोड़ दिया जाए तो अन्य जिलों से पुलिस 90 से 120 दिन में पासपोर्ट रिपोर्ट फाइल करती है। इसके कारण पासपोर्ट बनाने की त्वरित प्रक्रिया परवान नहीं चढ़ पा रही है।
जबकि आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली एवं हरियाणा सहित सभी राज्यों से पुलिस रिपोर्ट आने का नेशनल ऐवरेज 45 दिन का है।
वहीं यूपी के जिलों से पासपोर्ट की पुलिस रिपोर्ट औसतन 60 दिन में आती है। इसके कारण आवेदकों के पासपोर्ट समय से नहीं बन रहे हैं। यूपी की पुलिस सिर्फ पांच फीसदी पासपोर्ट रिपोर्ट तय समय 21 दिन में भेज रही है।
लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी आरएन राय की माने तो गोरखपुर एवं वाराणसी सेवाकेंद्र से संबंधित पूर्वांचल के जितने भी जिले हैं, उनकी पासपोर्ट पुलिस रिपोर्ट तीन से चार महीने में आती है।
क्षेत्रीय कार्यालय को पूर्वांचल के आजमगढ़, गाजीपुर, देवरिया, महाराजगंज, मऊ, बस्ती, जौनपुर आदि जिलों से पासपोर्ट रिपोर्ट मंगाने के लिए आवेदक की पैरवी पर रिमाइंडर भेजने पड़ते हैं।
जबकि पूर्वांचल के तमाम जिले पासपोर्ट विभाग से ऑनलाइन हो चुके, फिर भी रिपोर्ट समय से नहीं आती है।
मुख्यमंत्री का जिला नहीं ऑनलाइन
लखनऊ क्षेत्र के 49 जिले में से 14 जिले पासपोर्ट विभाग की ऑनलाइन प्रक्रिया से जुड़े हैं। जबकि 11 ऐसे जिले हैं, जिनमें अब तक ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, जिसमें मुख्यमंत्री का गृह जनपद इटावा भी शामिल है।
रमाबाईनगर (कानपुर देहात), कानपुर नगर, अंबेडकरनगर, गाजीपुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, हमीरपुर, बलिया, लखनऊ, देवरिया, वाराणसी, इलाहाबाद, कन्नौज, महोबा ऑनलाइन हो चुके।
सिद्घार्थनगर, सुल्तानपुर, बहराइच, रायबरेली, बांदा, चंदौली, सीएसएएमनगर (अमेठी), औरैया, मऊ, फैजाबाद, फतेहपुर, सोनभद्र, हरदोई, सीतापुर, महाराजगंज, संत कबीरनगर, बाराबंकी, जालौन, बस्ती, गोंडा, संत रविदासनगर में 50 फीसदी ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
जौनपुर, उन्नाव, मिर्जापुर, कौशांबी, झांसी, लखीमपुर, चित्रकूट, इटावा, ललितपुर, प्रतापगढ़, बलरामपुर में ऑनलाइन सिस्टम विकसित होना है।