गिरफ्त में आए सिपाही अरुण कुमार ने बताया कि वह कई परीक्षाओं में पेपर लीक कराकर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचा चुका है और उससे लाखों रुपये कमा चुका है। अरुण के पास से एसटीएफ को भारी संख्या में अलग-अलग परीक्षाओं के एडमिट कार्ड और परीक्षाओँ से जुड़े अन्य दस्तावेज मिले हैं। उसने बताया कि वह कोचिंग सेंटर के माध्यम से कैंडीडेट सेट करता था। एसटीएफ ने अरुण के पास से एक लाख 90 हजार रुपये बरामद किए हैं।
जिस कालेज में लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्ण और पुलिस कप्तान कलानिधि नैथानी कुछ देर पहले राउंड लगाकर निकले थे वहीं पर यूपी एसटीएफ के जवानों से सर्विलांस की मदद से ट्रैक करते हुए एक-दो नहीं बल्कि नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ के साथ प्लस प्वाइंट यह था कि उसके पास सटीक सूचनाएं थी और इंटर कालेज के बाहर इनोवा में बैठे अरुण कुमार को पहचानने वाला शख्स भी एसटीएफ के पास था।
सूत्रों की मानें तो अरुण कुमार सिंह की पहचान आशिक मिजाज सिपाही के रूप में रही है। वह काफी समय तक गोमतीनगर के पत्रकारपुरम चौराहे चौकी पर तैनात था। वह दो साल तक ड्यूटी से अनुपस्थित भी रहा। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई लेकिन उसने दोबारा पुलिस लाइन में आमद कराकर गोसाईंगंज में तैनाती पा ली।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रयागराज से भी एक सरगना और दो साल्वर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में सरगना कौशांबी निवासी नागेंद्र सिंह, अभ्यर्थी सुरेश कुमार यादव, साल्वर राजेश कुमार यादव और मनोहर कुमार शाह को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सहारा गर्ल्स इंटर कालेज करैली और सरोज विद्याशंकर इंटर कालेज झूंसी से की गई है। पूछताछ में मुख्य अभियुक्त नागेंद्र सिंह ने बताया कि वह बिहार से साल्वर बुलाकर यहां के अभ्यर्थियों के बदले परीक्षा में बैठाता था। एक साल्वर को 50 हजार रुपये दिए जाते थे। जबकि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के लिए ढाई लाख रुपये से तीन लाख रुपये लिए जाते थे।