प्रदेश के दो वांछित आईपीएस अधिकारियों को पुलिस तलाश नहीं पा रही है। एक अफसर भ्रष्टाचार में तो दूसरा आपराधिक मामले में वांछित है। एक को कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया है और दूसरे को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने गैरजमानती वारंट हासिल कर रखा है। अगर जल्द इन अफसरों की गिरफ्तारी में पुलिस नाकाम रहती है तो एसटीएफ की मदद ली जा सकती है।
आईपीएस अफसर अरविंद सेन पर पशुधन विभाग के नाम पर हुई ठगी में अभियुक्तों का साथ देने का आरोप है। इस पर शासन ने अरविंद को निलंबित कर दिया और उन्हें मौका दिया गया कि वे न्यायालय से अपने पक्ष में कोई फैसला करा लें। उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया भी और उन्हें 15 अक्तूबर तक फौरी राहत मिली भी, जो अब खत्म हो चुकी है। मियाद बीतने के बाद से पुलिस उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है, लेकिन वे पकड़ से दूर हैं।
इसी तरह महोबा के एसपी रहते हुए मणिलाल पाटीदार क्रशर व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के मामले में वांछित हैं। यह घटना हुए एक माह से ज्यादा हो गए, लेकिन पाटीदार की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ भी दोनों को गिरफ्तार करने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन आईपीएस अफसरों का मामला होने से कोई भी कुछ बोलने से बच रहा है।