योजना के तहत पांच धार्मिक शहरों नैमिषारण्य (सीतापुर), प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा व चित्रकूट में नए आवासीय राजकीय संस्कृत विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया था। यहां पर विद्यालय के साथ 100-100 बेड के छात्रावास भी बनने थे ताकि विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा के लिए भटकना न पड़े और उन्हें अपने शहर में ही रोजगार मिल सके। इसके अलावा वाराणसी, रायबरेली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, जालौन, अमेठी, मुरादाबाद, एटा, हरदोई में भी नए राजकीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना होनी थी।
अधिकारियों ने बताया कि उच्च स्तर से यह निर्देश दिया गया है कि विभाग अपने नए राजकीय संस्कृत विद्यालय खोलने की जगह अच्छे तरीके से चलाए जा रहे ट्रस्ट या निजी संस्कृत विद्यालयों को लेकर उनका संचालन करे। हालांकि, यह निर्देश दिए हुए भी काफी समय हो गया है। अब तक विभाग की ओर से ऐसे एक भी विद्यालय को चिह्नित नहीं किया गया है।