लखनऊ मंडल से सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि दोनों फर्मों के दस्तावेजों की जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि दोनों फर्मों ने फर्जी बिलों एवं काल्पनिक लाइसेंसधारी व गलत लाइंसेंस नंबर के आधार पर भी कोडीनयुक्त सिरप की आपूर्ति और विक्रय किया। पहले भी इस कंपनी के खिलाफ कोडीनयुक्त सिरप को नशे के रूप में बेचने के मामले सामने आ चुके हैं। जांच में पता चला कि यह सिरप नशे के लिए ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। इसका संगठित गिरोह है। इसे औषधि के रूप में प्रयोग करने के बजाय नशे के रूप में ही बेचा जा रहा है।
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ रोशन जैकब ने बताया कि प्रदेश में निरंतर जांच अभियान चल रहा है। जिन राज्यों में दवाओँ की आपूर्ति होने के सबूत मिले हैं, वहां भी अवगत कराया गाय है। अब तक 115 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। 16 एफआईआर दर्ज कर 6 को गिरफ्तार किया गया है। 25 मेडिकल स्टोर्स पर कोडीन युक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।