यूपी पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षाएं रविवार को पेपर लीक होने के बाद रद्द हो गईं थीं। अब इन परीक्षाओं को नई डेट आ गई है।
रविवार को यूपी पीसीएस की परीक्षाओं का पेपर लखनऊ के एक स्कूल से लीक हो गया था। सोमवार को सुबह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस परीक्षा को कैंसिल कर दिया था।
अब परीक्षा की नई डेट आ गई है। उप्र के विभिन्न शहरों में अब परीक्षा 10 मई को होगी। अखिलेश सरकार ने इस मसले को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा रद्द करने के आठ घंटे के अंदर इसकी नई तिथियों की घोषणा कर दी है।
दूसरी तरफ इस पेपर को लीक करने वाले भी धर लिये गए हैं। पेपर लीक करने वाले लखनऊ के हैं और अब तीन के तीनों पुलिस की गिरफ्त में हैं।
यह पेपर लखनऊ स्थित आलमबाग के एक स्कूल से लीक हुआ था। आलमबाग के आदर्श भारती स्कूल के संचालक ने दो अध्यापकों के साथ मिलकर पेपर का फोटो खीचा था। इसके बाद इसे वाट्सअप पर भेज दिया गया था।
इस तरह से हुआ था खुलासा
एसटीएफ ने गिरफ्तार किए गए आदर्श भारतीय विद्यापीठ के संचालक विशाल मेहता, शिक्षक ज्ञानेंद्र सिंह व जय सिंह को कृष्णानगर कोतवाली में भेज दिया है।
पूछताछ में तीनों ने कबूल किया उन्होंने पेपर लीक करने की योजना पहले से ही बना रखी थी और दोनों पालियों के पेपर की फोटो खींच कर चुनिंदा अभ्यर्थियों को पहुंचानी थी। इसके लिए जय सिंह ने कुछ लोगों ने संपर्क किया था, जो पेपर खरीदने के इच्छुक थे।
स्कूल के संचालक विशाल मेहता ने एसटीएफ अफसरों को जानकारी दी कि उसे पता था कि पीसीएस परीक्षा का पेपर केंद्र (स्कूल) पर परीक्षा से एक घंटा पहले ही पहुंचा दिया जाएगा।
जैसे ही परीक्षा शुरू होती और पेपर बांटे जाने की कवायद शुरू होती, वह मोबाइल फोन से फोटो खींच लेते और फिर अपने खास लोगों को वाट्सऐप के जरिए भेज देते।
अध्यक्ष को हटाने की मांग की
पेपर लीक प्रकरण और गिरफ्तारी के बाद अब लोक सेवा आयोग ने परीक्षा की तारीख 10 मई तय कर दी है। यह निर्णय आयोग की बैठक में लिया गया। साथ ही जहां से पेपर लीक हुआ उस सेंटर को भी डिबार कर दिया गया है।
इसके अलावा इलाहाबाद में मामले पर छात्र और प्रतियोगी लोकसेवा आयोग और इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में इकट्ठा हुए। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव को हटाने और प्राथमिक परीक्षा की दोनों पालियों में हुए पेपर रद्द करने की मांग की।
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यक्ष की प्रतीकात्मक शव यात्रा भी निकाली और उसे हटाने की मांग भी की। प्रतियोगियों ने यह भी मांग की कि पिछले दो साल में वर्तमान अध्यक्ष अनिल यादव की देखरेख में जितनी भी भर्तियां हुईं, उनकी सीबीआई जांच की जाए।