इस सख्ती की वजह से पान मसाला इकाइयों में उत्पादन लगभग बंद हो गया है। जांच के दायरे में प्रमुख रूप से पुकार, शिमला, गोमती, कमला पसंद, कायम, दबंग, हरश्रंगार, शिखर, केसर, सिग्नेचर, एसएनके, शुद्ध प्लस, तिरंगा और किसान पान मसाला ब्रांड आए हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक करीब पांच उद्यमी यूपी की सीमा से लगे राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और गुड़गांव में इकाई लगाने की तैयारी में हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अधिकांश टीमों की चौबीस घंटे ड्यूटी मसाला इकाइयों के बाहर लगते ही नकली पान मसाला की आवक तीन गुना तक बढ़ गई है। चूंकि नकली मसाला फैक्टरी से राजस्व नहीं मिलता इसलिए अधिकारियों की उन्हें पकड़ने में खास रुचि नहीं होती।
राज्य कर विभाग की जांच से सेंट्रल जीएसटी के अधिकारी राजस्व को लेकर परेशान हो गए हैं। दरअसल पान मसाले पर 28 फीसदी जीएसटी और 60 फीसदी सेस है। सेस पूरी तरह सेंट्रल जीएसटी को मिलता है।