वित्त विभाग को आशंका है कि यदि क्षेत्रीय ब्रांड्स की बिक्री और मांग में गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर राज्य के कर राजस्व पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू उद्योग कर संग्रह का एक बड़ा स्रोत है, जिसमें क्षेत्रीय कंपनियों की भूमिका अहम मानी जाती है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है 2000 197108 कि इस क्षेत्र में फिलहाल पुरानी कर व्यवस्था को ही जारी रखा जाए। उद्योग जगत का भी मानना है कि नई प्रणाली से न केवल क्षेत्रीय इकाइयों का अस्तित्व संकट में पड़ेगा, बल्कि समग्र रूप से कर संग्रह में भी कमी आ सकती है। अब निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि 1 फरवरी से लागू होने जा रही इस कर व्यवस्था पर वह क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह निर्णय केवल उद्योग के भविष्य ही नहीं, बल्कि राज्य के राजस्व संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।