पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह गाजियाबाद के लोनी से धर्मवारी से कच्चा माल मंगवाते थे। यहां पर इंजेक्शन तैयार करके उसे बेचा जाता था। यह इंजेक्शन जानवरों के लिए बनाया जाता है। डेयरी संचालकों में इसकी बहुत मांग है है। एक इंजेक्शन 100 रुपये में डेयरी संचालकों को बेचा जाता है।
20 रुपये में खरीदकर 80 रुपये में बेचते थे
आरोपी थोक में 20 रुपये में 100 मिलीलीटर की दर से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन खरीदते हैं। इसके बाद इसमें मिलावट कर 80 रुपये में बेचते हैं। गिरोह के लोग फुटकर में किसानों और डेयरी संचालकों को यही इंजेक्शन 200 रुपये में सप्लाई करते हैं। सीतापुर, बाराबंकी, हरदोई, बलरामपुर, बहराइच, उन्नाव समेत आसपास के कई जिलों में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की कालाबाजारी हो रही है। सब्जी और फलों का आकार बढ़ाने के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।
ड्रग इंस्पेक्टर संदेश ने बताया पकड़े गए आरोपियों ने अपना नेटवर्क आसपास के जिलों में फैला रखा था। बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर, अयोध्या, कानपुर, हरदोई समेत अन्य जिलों में इस इंजेक्शन की आपूर्ति हो रही थी। आरोपियों ने बताया कि वह सरकारी बस या निजी वाहन से इंजेक्शन ले जाकर आपूर्ति करते थे।
टीम में ये रहे शामिल
एसटीएफ के उप निरीक्षक हरीश चौहान, ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्य, उन्नाव के ड्रग इंस्पेक्टर अशोक कुमार, रायबरेली के ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बच्चों के जन्म के समय गर्भाशय संकुचन बढ़ाने के लिए दिया जाता है। इससे प्रसव शुरू करने में मदद मिलती है। यह दूध निकालने के प्रक्रिया में प्रारंभिक हार्मोन के रूप में काम करता है। इसी वजह से पशुओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन देने से दूध उत्पादन बढ़ता है, लेकिन इस इंजेक्शन के देने के बाद निकाला गया दूध हानिकारक होता है। इसी वजह से जानवरों पर इसका प्रयोग प्रतिबंधित है।
सेहत पर खराब असर डालता है ऑक्सीटोसिन
सब्जी व दूध के लिए प्रयोग किया गया ऑक्सीटोसिन आम आदमी की सेहत के लिए खतरनाक होता है। इससे लोगों के हार्मोन पर प्रभाव पड़ता है। साथ ही पेट से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ती हैं। इसके सेवन से लोगों में चिड़चिड़ापन और तनाव भी होता है। यह एलर्जी की समस्या का सबसे बड़ा कारण है। दूध में ऑक्सीटोसिन की मिलावट की वजह से शरीर के किसी भी हिस्से में खुजली, सूजन या फिर सांस लेने में समस्या आ सकती है। इससे बांझपन की समस्या भी हो सकती है।