जीएसटी पंजीकरण में तेजी लाने के सरकारी निर्देशों के बाद यह व्यवस्था जालसाजों के लिए सोना बनती जा रही है। शासन ने व्यापारियों को 24 घंटे के भीतर पंजीकरण देने के निर्देश दिए थे, लेकिन सत्यापन की खामियों और प्रक्रियागत पाइपलाइन में दरारों का फायदा उठाकर फर्जी फर्मों के नेटवर्क ने बड़े पैमाने पर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का दुरुपयोग शुरू कर दिया।
स्थानीय व्यापारियों और विभागीय सूत्रों की शिकायत है कि रोजाना सैकड़ों-हजारों (स्थानीय रूप से 1,000 से अधिक) फर्जी आवेदन पोर्टल पर आ रहे हैं, जिन्हें रोकने के बाद भी कुछ समयावधि में स्वचालित सिस्टम पंजीकरण दे देता है। विभागीय प्रशिक्षण की कमी भी बड़ी समस्या है। करीब 60 फीसदी अधिकारियों को आवश्यक फील्ड-ट्रेनिंग नहीं मिली है, जिससे सत्यापन और फॉलो-अप कमजोर पड़ते हैं।
हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यापारी को चौबीस घंटे में पंजीकरण देना अच्छा फैसला है। लेकिन, ये चोरों के लिए नहीं है। जालसाज ई-वे बिल जारी करने के लिए मोबाइल-ओटीपी व नंबर बदलने के हथकण्डे अपनाकर नकली लेनदेन कर रहे हैं और आईटीसी लेकर लापता हो जाता हैं।
इस पर रोक लगाने के लिए जरूरी है कि सत्यापन पूरा होने तक पंजीकरण पर अस्थायी सीमाएं लगाई जाएं और पोर्टल पर लगातार मॉनिटरिंग टीमें बैठकर संदिग्ध कामकाज को ब्लॉक करें। शासन ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए निर्देश जारी किए हैं। जिनमें पते पर फिजिकल सत्यापन को मजबूर करने की प्रक्रिया तेज करने की बात भी शामिल है और संदिग्ध रजिस्ट्रेशन की रद्दीकरण-प्रक्रियाएं त्वरित करने के आदेश दिये जा रहे हैं।