अलीगढ़ में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव को पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर मिलावटी शराब बनाने के काम और भंडारण को खत्म कराने का आदेश दिया है। आयोग के आदेश में सरकार से तीन बिन्दुओं पर काम करने के लिए कहा गया है जिससे जहरीली शराब पीकर लोग न मरें।
अलीगढ़ में 70 से अधिक मौत हो जाने के बाद आयोग ने इस प्रकरण में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने माना है कि मौतों केबाद 10 से अधिक शवों का बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार करना और कई की हालत अब भी नाजुक होना दु:खद प्रकरण है। आयोग के सदस्य जस्टिस केपी सिंह और ओपी दीक्षित ने इस प्रकरण में गंभीरतापूर्वक विमर्श के बाद जारी आदेश में कहा है कि मनुष्य के स्वास्थ्यप्रद परिवेश में सुरक्षित रूप से जीने का अधिकार निहित होने के कारण मानव अधिकार के अंर्तगत आच्छादित है। ऐसे में भविष्य में ऐेसी घटनाएं होने से रोकना आवश्यक है। आयोग ने अपने आदेश पर कार्रवाई कर चार सप्ताह में मुख्य सचिव के अलावा पुलिस महानिदेशक और आबकारी आयुक्त को रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
इन बिन्दुओें पर होगी कार्रवाई
1- जिन गांवों में शराब पीने के आदी लोग हैं। उनको चिन्हिंत कर थाना, तहसील स्तर पर अभियान चलाकर अवैध शराब ठेकों से खरीदना और सेवन करना बंद कराया जाए।
2- सभी जनपद में थाना, तहसील में प्रमुख जगहों पर अधिकृत ठेकों से ही शराब खरीदकर सेवन करने के लिए लोगों को सचेत किया जाए।
3- सभी जिलों में एलआईयू को सक्रिय कर अवैध शराब बनाने में लिप्त लोगों, गांवों की सूची बनाकर प्रशासन, पुलिस, आबकारी विभाग संयुक्त कार्रवाई कर इन शराब निष्कर्षण, भंडारण, विक्रय स्थलों को पूरी तरह नष्ट कराया जाए।