प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 20 मई से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। साप्ताहिक रोस्टर के अनुसार 50 प्रतिशत कर्मचारी-अधिकारी उपस्थित होंगे। वहीं शिक्षकों को परिसर में बुलाने का निर्णय लेने के लिए कुलपति और प्रधानाचार्य को अधिकृत किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने मंगलवार को इसका शासनादेश जारी किया।
उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अब्दुल समद के अनुसार प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम से संबंधित शिक्षण कार्य ऑनलाइन कराया जाएगा। विद्यार्थियों को परिसर में उपस्थित नहीं होना है। जबकि शिक्षकों की उपस्थिति का निर्णय कुलपति एवं प्राचार्य लेंगे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन क्लास के लिए उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी में प्रदेश के सर्वोतम शिक्षकों ने उत्कृष्ट ई कंटेंट अपलोड किए गए हैं। डिजिटल लाइब्रेरी पर उपलब्ध पाठ्यसामग्री का उपयोग विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षा में कर सकते है।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों या विद्यार्थियों के संक्रमित होने अथवा नेगेटिव रिपोर्ट के बाद किसी अन्य चिकित्सीय कठिनाई के समय पठन-पाठन ऑनलाइन जारी रखने या बंद करने का निर्णय संबंधित कुलपति, विभागाध्यक्ष या प्रधानाचार्य लेंगे।
विभाग ने जिले में ऑनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपी है। वहीं संबंधित मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक इसकी निगरानी करेंगे। विभाग के निदेशक को इसकी नियमित समीक्षा करने और साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट शासन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी शिक्षक, विद्यार्थी या उसके परिवार में कोई सदस्य कोरोना संक्रमित या पोस्ट कोविड समस्या से ग्रस्त है तो उन्हें ऑनलाइन कक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
माध्यमिक विद्यालयों में भी 20 मई से ऑनलाइन कक्षाएं
प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के सभी माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध विद्यालयों में दूरदर्शन, ई-ज्ञान गंगा पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल के जरिये भी ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव जयशंकर दुबे ने मंगलवार को इसका शासनादेश जारी किया है। विशेष सचिव ने निर्देश दिए हैं कि विद्यालय प्रबंधक, प्रधानाचार्य ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन की इस प्रकार व्यवस्था करें।