करीब तीन माह पहले परिजन बच्ची को लेकर लोहिया संस्थान के कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे। विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि बच्ची के दिल के पास एक ऐसी रक्तवाहिका थी, जो सामान्य तौर पर जन्म के बाद खुद बंद हो जाती है, लेकिन उसमें यह खुली रह गई थी। चिकित्सा विज्ञान में इसे पीडीए (पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस) कहते हैं। रक्तवाहिका के खुले रहने से बच्ची के दिल और फेफड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ रहा था।
डॉ. भुवन ने बताया कि कैथेटर के जरिये दिल के पास खुली रक्तवाहिका को खास डिवाइस की मदद से बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र की बच्ची का इस तरह का इलाज विभाग में पहली बार किया गया है। बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की समय पर पहचान जरूरी है।
कई बीमारियों का इलाज अब बिना ओपन हार्ट सर्जरी कैथेटर के जरिये किया जा सकता है। इलाज करने वाली टीम में डॉ. आशीष झा, डॉ. मिथिलेश यादव और डॉ. नीरज अवस्थी शामिल रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने डॉक्टरों की टीम को बधाई दी।